नेपाल बाढ़ में बिहार के एक ही परिवार के 5 लोग लापता, अपनों की आस लगाए बैठे परिजन

नेपाल में आई बाढ़ के बाद बिहार के पूर्वी चंपारण के 12 लोग लापता बताए जा रहे हैं. राहत-बचाव टीमें बचाव अभियान में लगी हैं, लेकिन अब तक इन लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है.

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नेपाल बाढ़ (Photo: PTI) नेपाल बाढ़ (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:38 AM IST

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. इस बाढ़ ने एक पल में बिहार के कई परिवारों की खुशियां छीन लीं. पूर्वी चंपारण के 12 लोग लापता बताए जा रहे हैं. नेपाल में राहत-बचाव टीमें लापता लोगों की तलाश कर रही हैं लेकिन अब तक इन 12 लोगों का कुछ पता नहीं चल पाया है. 

इन 12 लोगों में एक ही परिवार के पांच लोग भी शामिल हैं. अपनों के लौटने की उम्मीद में परिवार लगातार उनके इंतजार में है. अदापुर इलाके के आठ लोगों का भी कोई पता नहीं चल पाया है. इनमें बरवा गांव के संजोग महतो, उचीडिह गांव के उमेश प्रसाद और बृज किशोर पासवान भी शामिल हैं, जो अब तक लापता है. 

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परिवार हर फोन और मैसेज को इसी उम्मीद से देख रहा है कि शायद इसमें उनके अपनों की कोई खबर हो. लेकिन उनका इंतजार लंबा होता जा रहा है, और अब तक उनके परिजनों का पता नहीं चल पाया है . 

लाला छपरा गांव का एक परिवार भी नेपाल की बाढ़ के बाद से लापता है. इस परिवार के मुखिया बुध्र साल नेपाल के भीमफेदी में कबाड़ की दुकान चलाते थे. हादसे के समय वे अपनी बेटियों आशा, रूपा और संध्या, पत्नी मानवी देवी और पोती आयुषी के साथ पहाड़ी इलाके में सामान लेने गए थे. उसके बाद से ही उनका परिवार से संपर्क नहीं हो पाया है. 

केसरिया-चकिया इलाके के जागीरहा गांव के तीन लोग और चौरादानो के हरदिया गांव के एक व्यक्ति भी लापता बताए जा रहे हैं. चकिया की सब डिविजनल ऑफिसर शिवानी शिवम और केसरिया की सर्कल ऑफिसर पूनम मिश्रा के मुताबिक लापता लोगों की पहचान रामबाबू प्रसाद मोह, प्रमोद कुमार साह और मुनील कुमार साह के तौर पर हुई है. 

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वहीं हरदिया गांव के लापता निवासी की पहचान अरमान मिया के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि वे नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार में दर्जी का काम करते थे. बुधवार से ही अरमान का परिवार उनके इंतजार में बैठा है, लेकिन अब तक उनका अरमान से कोई संपर्क नहीं हो पाया है. 

इसके अलावा, नेपाल में काम करने वाले समस्तीपुर निवासी अजय पोद्दार ने बताया कि बाढ़ के बाद उनके आठ दोस्त भी लापता हैं. वे भी बिहार के अलग-अलग जिलों से आते थे. अजय पोद्दार के मुताबिक, वे 12 दोस्त यहां मजदूरी का काम करते थे. उन्होंने कहा, "हम में से चार लोग काठमांडू हार्डवेयर का सामान खरीदने के लिए गए थे. जब हम लौटे तो हमने देखा कि बाढ़ में वह इलाका बह गया था. हमें अपने दोस्तों की चिंता हुई. लेकिन हालात को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने हमें उस जगह के करीब जाने से रोक दिया."

वहीं, विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बताया था कि नेपाल में 275 से ज्यादा भारतीय और भारतीय मूल के 128 लोग लापता हैं. फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो पाया है. हालांकि रविवार तक 149 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था. 

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नेपाल की इस बाढ़ के कारण अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है. जबकि हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ ने घस, सड़कें, पुल, पुलिया सब बहा दी. लेकिन इस भीषण तबाही के बीच भी लापता लोगों का परिवार अब भी एक उम्मीद के साथ बैठा है कि उनके परिजन सुरक्षित होंगे और जल्द वापस आएंगे. 

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