मिजोरम में एक महिला ने 'मीजो मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट 2014' में किए गए संशोधनों को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी. इस याचिका सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. महिला ने याचिका में राज्य विधानसभा के हिंदू विवाह अधिनियम/मीजो मैरिज एक्ट में किए गए संशोधनों को 'बेहद चिंताजनक' बताया है.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुनवाई के बजाय गुवाहाटी हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच के सामने अपनी बात रखने की सलाह दी है. सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि हम गुवाहाटी हाईकोर्ट से इस मामले पर तुरंत विचार करने की अपील करेंगे.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'ये एक अच्छा कारण है, उन्हें लड़ने दें, लेकिन ये लड़ाई हाईकोर्ट में होनी चाहिए.'
आइजोल बेंच के बजाय गुवाहाटी में सुनवाई की गुहार
याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में महिला की सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़ी चिंताएं रखीं. वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता आइजोल के पास एक आदिवासी इलाके में रहती हैं और वहां एक बिजनेस से जुड़ी हैं, जिससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिलता है.
वकील ने आशंका जताई कि आइजोल स्थित हाईकोर्ट की बेंच के सामने मामला उठाने से उनके बच्चों और काम में बाधा पैदा हो सकती है और उन्हें स्थानीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ सकता है.
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली में मामला आने पर समाचार पत्रों में छपने के कारण ज्यादा चर्चा हो सकती है. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता की आइजोल बेंच से जुड़ी आशंका का समाधान गुवाहाटी हाईकोर्ट के CJI से अनुरोध करके निकाला जा सकता है, ताकि वो मामले को गुवाहाटी स्थित प्रिंसिपल बेंच के सामने सूचीबद्ध कर सकें.
यह भी पढ़ें: पहले मिजोरम में 6 यूक्रेनी और अब नेपाल बॉर्डर पर अमेरिकी गिरफ्तार, क्या बड़े खतरे का संकेत?
सुप्रीम कोर्ट का रुख: हाईकोर्ट जाने की दी छूट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मिजोरम विधानसभा की ओर से कानून में संशोधन किया गया है, इसलिए याचिकाकर्ता के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की कोई जरूरत नहीं है. उनकी शिकायतों का निपटारा संबंधित क्षेत्राधिकार वाला हाईकोर्ट कर सकता है.
अनीषा माथुर