दतिया उपचुनाव: मतगणना से ठीक पहले कांग्रेस का एक्शन, पूर्व MLA राजेंद्र भारती पार्टी से सस्पेंड

दतिया उपचुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस के एक फैसले ने सियासी हलचल बढ़ा दी है. पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है. अब सबकी नजर मतगणना पर है.

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कांग्रेस ने राजेंद्र भारती को पार्टी से सस्पेंड किया. (File Photo) कांग्रेस ने राजेंद्र भारती को पार्टी से सस्पेंड किया. (File Photo)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल,
  • 02 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:38 PM IST

दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना से ठीक पहले कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाया है. पार्टी ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को निलंबित कर दिया. उन पर उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह के खिलाफ भीतरघात करने का आरोप लगा था. अब सोमवार 3 अगस्त को होने वाली मतगणना से ठीक पहले इस कार्रवाई ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है.

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दरअसल, राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता खत्म होने के बाद ही दतिया सीट पर उपचुनाव कराया गया. दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उनकी विधायकी चली गई और सीट खाली हो गई. कांग्रेस ने इस उपचुनाव में घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया. चुनाव प्रचार के दौरान घनश्याम सिंह ने खुलकर आरोप लगाया था कि पार्टी के भीतर से ही उनके खिलाफ काम किया जा रहा है. इसी विवाद के कारण कांग्रेस ने राजेंद्र भारती पर कार्रवाई की.

सोमवार को होगी मतगणना

दतिया उपचुनाव की मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे से शुरू होगी. जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े के मुताबिक सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती होगी. इसके बाद ईवीएम में दर्ज वोट गिने जाएंगे. 30 जुलाई को हुए मतदान में 71.44 फीसदी वोट पड़े थे.

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इस सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच माना जा रहा है. कुल 21 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें आजाद समाज पार्टी के दामोदर सिंह यादव भी शामिल हैं. बीजेपी ने इस बार पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया. 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने उन्हें हराया था.

नतीजों पर सबकी नजर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया उपचुनाव का नतीजा सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं होगा. इसे दोनों प्रमुख दलों की साख से भी जोड़कर देखा जा रहा है. हाल के छात्र आंदोलनों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बदले राजनीतिक माहौल में इस चुनाव पर सभी की नजर है.

अगर कांग्रेस यह सीट बचाने में सफल रहती है, तो पार्टी इसे अपने पक्ष में बन रहे माहौल का संकेत बताएगी. वहीं बीजेपी की जीत को मुख्यमंत्री मोहन यादव और नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व के समर्थन के रूप में देखा जाएगा. 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में फिलहाल बीजेपी के 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 64 सीटें हैं. इसलिए सरकार पर इस नतीजे का असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसके राजनीतिक मायने जरूर निकाले जाएंगे.
 

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