लद्दाख की बर्फीली वादियों से निकलने वाली पश्मीना अब दुनिया के लग्जरी फैशन बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने की तैयारी में है. सदियों पुरानी इस कारीगरी को नए बाजारों तक पहुंचाने के लिए लेह में 23 अक्टूबर को लद्दाख पश्मीना कॉन्क्लेव 2026 की शुरुआत हुई. उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन किया. इस दौरान केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय और लद्दाख प्रशासन के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस कार्यक्रम का मकसद पश्मीना की पहचान मजबूत करना और इससे जुड़े लोगों के लिए नए अवसर तैयार करना है.
कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में कपड़ा मंत्रालय और लद्दाख प्रशासन के बीच हुआ समझौता बेहद अहम रहा. इसके जरिए पश्मीना क्षेत्र के विकास के लिए सहयोग मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया गया. कार्यक्रम में GI टैग वाली लद्दाख पश्मीना को समर्पिक खास डाक कवर भी जारी किया गया.
कार्यक्रम में लद्दाख की पश्मीना पर एक फिल्म भी दिखाई गई. वक्ताओं ने कहा कि इस क्षेत्र की असली ताकत उसकी पारंपरिक जानकारी और कारीगरों का हुनर है. इसे बचाते हुए कारोबार को आगे बढ़ाना जरूरी है. यह आयोजन मिनिस्ट्री ऑफ माइक्रो, स्मॉल, और मीडियम इंटरप्राइसेज के रैंप (RAMP) कार्यक्रम के तहत लद्दाख के इंडस्ट्रीज एंज कॉमर्स विभाग ने आयोजित किया है.
मंगोलिया, कोरिया और जापान से भी जुड़ेगा बाजार
कॉन्क्लेव के पहले तकनीकी सत्र में भारत और विदेशों में पश्मीना के बाजार पर चर्चा हुई. केंद्रीय ऊन बोर्ड के कार्यकारी निदेशक जीएस भट्टी ने इस क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों और आगे की संभावनाओं की जानकारी दी.
इस दौरान मंगोलिया के कश्मीरी ऊन उद्योग, दक्षिण कोरिया में लग्जरी कश्मीरी ब्रांड और जापान के साथ प्रीमियम और टिकाऊ कपड़ों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं सामने रखीं. ऑल चांगथांग पश्मीना ग्रोअर्स कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसाइटी के थिनले ने लद्दाख की पश्मीना की खासियत बताई.
चांगथांग से बाजार तक पहुंचेगी पश्मीना
विदेशी प्रतिनिधियों ने पश्मीना डीहेयरिंग प्लांट का दौरा किया. यहां उन्होंने रेशों की प्रोसेसिंग और उनकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किए जा रहे कामों को समझा. आधुनिक मशीनों और बेहतर प्रोसेसिंग से पश्मीना की क्वालिटी, सप्लाई चेन और बाजार में उसकी बिक्री को मजबूत करने पर जोर दिया.
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इसके अलावा, उद्योग निदेशक सोनम नोरबू ने पश्मीना उत्पादों, हस्तशिल्प और हथकरघा परंपराओं की प्रदर्शनी में स्टॉल का उद्घाटन किया. यहां लद्दाख के कारीगरों के हुनर और पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार के अनुरूप पेश करने की संभावनाएं दिखाई गईं.
पश्मीना से जुड़े पशुपालकों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों को बेहतर अवसर मिलना भी जरूरी है. इसके लिए गुणवत्ता की जांच, ब्रांडिंग, कौशल विकास, संसाधनों का टिकाऊ इस्तेमाल और बाजार तक सीधी पहुंच जैसे मुद्दे अहम हैं. कॉन्क्लेव का दूसरा दिन 24 अक्टूबर को आयोजित होगा. इसमें पश्मीना क्षेत्र को मजबूत करने, साथ ही नेशनल और इंटरनेशनल बाजारों में इसकी संभावनाएं बढ़ाने पर चर्चा जारी रहेगी.
लद्दाख की पश्मीना के पीछे चांगथांग के पशुपालकों और कारीगरों की पीढ़ियों का हुनर है. अब चुनौती इस विरासत को केवल पारंपरिक पहचान तक सीमित न रखकर दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की है. लेह में हुआ यह कॉन्क्लेव उसी दिशा में एक कदम है.
अशरफ वानी