आज 15 अगस्त की सुबह देश तिरंगे के रंग में रंगा हुआ है. कहीं स्कूलों में झंडा फहराया जा रहा है, कहीं देशभक्ति के गीत बज रहे हैं. वाराणसी में आजादी के जश्न की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली. यहां बाबा काशी विश्वनाथ का दरबार भी तिरंगे के रंग में सज गया. सुबह-सुबह जब मंगला आरती हुई तो बाबा विश्वनाथ का श्रृंगार केसरिया, सफेद और हरे रंग के फूलों से किया गया. यानी देश का तिरंगा और बाबा की भक्ति, दोनों एक ही जगह नजर आए.
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस का मौका है. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में हर दिन भक्तों की भीड़ और भक्ति का माहौल रहता है, लेकिन 15 अगस्त की सुबह यहां का नजारा थोड़ा अलग है. बाबा के दरबार में फूलों से तिरंगे का स्वरूप तैयार किया गया. केसरिया, सफेद और हरे रंग के फूलों से बाबा का अद्भुत श्रृंगार किया गया. जैसे ही मंगला आरती शुरू हुई, शंख और घंटियों की आवाज से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा.
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एक तरफ आरती की धुन थी, दूसरी तरफ तिरंगे के रंग. और इन दोनों के बीच बाबा विश्वनाथ का दिव्य स्वरूप. काशी में बाबा विश्वनाथ के दरबार में त्योहारों और खास मौकों पर अलग-अलग तरह के श्रृंगार होते हैं, लेकिन स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा श्रृंगार अपने आप में खास रहा. भक्तों के लिए यह सिर्फ फूलों की सजावट नहीं थी, बल्कि आस्था के साथ देशभक्ति का एहसास भी था.
मंगला आरती के दौरान मंदिर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया. शंख की आवाज, घंटियों की गूंज और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच तिरंगे के तीन रंग बाबा के दरबार की खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे. केसरिया, सफेद और हरा... तीनों रंगों की फूलों से सजावट ने बाबा विश्वनाथ के दरबार को एक अलग ही रूप दे दिया.
सोचिए, सुबह का वक्त है. काशी की गलियां अभी पूरी तरह जागी भी न हों. मंदिर में मंगला आरती शुरू है. शंख और घंटियां बज रही हैं. और सामने बाबा विश्वनाथ तिरंगे के रंगों में सजे हों. यही तस्वीर आज 15 अगस्त की सुबह वाराणसी में दिखाई दी. देश आजादी का जश्न मना रहा है और काशी अपने आराध्य के दरबार में उसी जश्न को आध्यात्म से जोड़ रही है.
इस पूरे आयोजन की खास बात यही रही कि यहां राष्ट्रभक्ति और भोले की भक्ति एक साथ दिखाई दी. तिरंगे के रंगों में सजे बाबा विश्वनाथ का यह स्वरूप भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा. आज 15 अगस्त की सुबह बाबा विश्वनाथ के दरबार में जब तिरंगे के तीनों रंग फूलों के जरिए उतरे, तो भक्ति और देशभक्ति का ये संगम देखने लायक बन गया.
रोशन जायसवाल