कर्नाटक मंत्रिमंडल का विस्तार शाम 5 बजे लोकभवन में होगा. लंबे समय से कयास लगाए जा रहे थे कि मंत्रिमंडल का विस्तार कब होगा और कौन संभावित मंत्री बनेंगे. अब इसपर से पर्दा उठ गया हैं.
कर्नाटक सरकार की मंत्री गायत्री शांतगौडा की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस के अंदर विरोध बढ़ गया है. खबरों के मुताबिक, उन्हें मंत्री बनाने का फैसला मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की बजाय पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पहल पर हुआ था.
विवाद की वजह यह है कि मंत्री पद की शपथ लेते समय गायत्री शांतगौडा न तो विधायक (MLA) थीं और न ही विधान परिषद (MLC) की सदस्य थी. ऐसे में सवाल उठना तो लाज़्मी था. अब उनकी नियुक्ति को लेकर पार्टी में विरोध तेज हो गया है. सूत्रों के अनुसार, इस विवाद के चलते उन्हें मंत्रिमंडल से हटाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है. हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है.
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कर्नाटक सरकार ने सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने की कोशिश की है. 7 लिंगायत नेताओं को पद दिए गए हैं. साथ ही, पहले सिद्धारमैया कैबिनेट की तरह 5 वोक्कालिगा नेताओं को मंत्री पद दिए गए हैं. कर्नाटक के इतिहास में पहली बार अनुसूचित जाति(SC) के 7 मंत्री बनने जा रहे हैं. अनुसूचित जाति को उचित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है. साथ ही कैबिनेट में अनुसूचित जनजाति के भी 3 मंत्रियों को शामिल किया जा रहा है. मुसलमान समुदाय के 4 नेताओं को मंत्री बनाया गया है. खास बात तो ये है कि दोनों डिप्टी स्पीकर भी पिछड़े वर्ग के हैं.
कुल मिलाकर, 38 अहम पदों में से 23 (यानी 60% से ज़्यादा) पद SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं के पास हैं. इस समीकरण से सरकार जनता को संदेश देना चाहती है कि यह सरकार सिर्फ़ सामाजिक न्याय की बात नहीं करती, बल्कि सत्ता के बंटवारे में इसे असल में लागू भी करती है.
सगाय राज / नागार्जुन