24 दिन, हजारों छात्र और एक अटूट जिद... जानिए कैसे झारखंड के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से उठी आवाज ने हिला दी सोरेन सरकार?

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर जुलाई के आखिर से चल रहा छात्र आंदोलन 24वें दिन समाप्त चुका है. रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शुरू हुए इस धरने में भूख हड़ताल, 10 अगस्त का विधानसभा मार्च और उस पर लाठीचार्ज, फिर 9 और 17 अगस्त की सरकारी घोषणाएं शामिल हैं. सरकार ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा, बैकलॉग परीक्षाएं और अब जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा भी रद्द कर दी है. टीडीपीएल से जुड़ी सभी परीक्षाओं की सीआईडी जांच होगी.

Advertisement
24 दिन के आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन ने ऐलान किया कि TDPL की परीक्षाओं की होगी CID जांच (Photo: PTI) 24 दिन के आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन ने ऐलान किया कि TDPL की परीक्षाओं की होगी CID जांच (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:25 AM IST

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर चला 24 दिन का छात्र आंदोलन सोमवार को उस समय बड़े मोड़ पर पहुंचा जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का ऐलान कर दिया. इसके बाद भूख हड़ताल पर बैठे तीनों छात्र नेताओं देवेंद्र नाथ महतो, उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति ने अपना अनशन समाप्त कर दिया. हालांकि सीबीआई जांच की मांग अब भी अधूरी है, इसलिए आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा.

Advertisement

आंदोलन की शुरुआत जुलाई के आखिरी हफ्ते में हुई थी. हजारों अभ्यर्थी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटकर धरने पर बैठ गए और जेपीएससी की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा तथा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप लगाए. इस पूरे आंदोलन की खास बात यह रही कि इसे किसी एक राजनीतिक दल का मंच नहीं बनने दिया गया. स्टेडियम में दो अलग मंच बनाए गए थे ताकि आंदोलन गैर-राजनीतिक बना रहे.

अगस्त की शुरुआत में आंदोलन ने भूख हड़ताल के साथ नया मोड़ लिया. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया. उनके साथ उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति समेत कुल आठ प्रदर्शनकारी अनशन पर बैठे. महतो ने चौथे दिन ही कहा था कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, यह लड़ाई जारी रहेगी, चाहे कफन में लिपटना पड़े. भारी बारिश के बीच राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी खुद पहुंचे और डॉक्टरों को इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'सदन में बने ऐसा कड़ा कानून, जिससे कोई छात्र ठगा न जाए', अनशन खत्म कर बोले छात्र नेता देवेंद्र महतो

9 अगस्त को सरकार और छात्रों के बीच मैराथन बातचीत हुई. सरकार ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और 2023-2025 की बैकलॉग परीक्षाएं रद्द कीं और तीनों जेपीएससी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया. मंत्री सुदिव्य कुमार ने इसे 98 प्रतिशत मांगें मानने का दावा बताया, लेकिन जेएसएससी-सीजीएल रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग उस वक्त ठुकरा दी गई थी.

इस आंशिक फैसले से नाराज छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा तक मार्च निकाला. पुलिस ने वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल भी किया. इस दौरान देवेंद्र महतो की तबीयत अचानक बिगड़ गई, ब्लड शुगर तेजी से गिरा और उन्हें स्ट्रेचर पर अस्पताल ले जाना पड़ा. उनके सहयोगी ने आरोप लगाया कि लाठीचार्ज में उन्हें चोट भी आई. इस झड़प में कई पुलिसकर्मी और कई छात्र घायल हुए.

इस घटना ने राजनीतिक पारा भी चढ़ा दिया. अगले दिन यानी 11 अगस्त को बीजेपी ने राज्यव्यापी बंद बुलाया. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया. उसी दिन एबीवीपी ने भी पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा तक मार्च निकाला, जिसमें कई कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है और सिर्फ बातचीत से समाधान निकल सकता है. इस पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस खुद झारखंड में जेएमएम के साथ सरकार में है, इसलिए राहुल गांधी का बयान दोहरा मापदंड है. दिल्ली में जंतर-मंतर पर चले कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन से भी झारखंड आंदोलन की तुलना होती रही, और बीजेपी ने आरोप लगाया कि कॉकरोच जनता पार्टी झारखंड के मामले में मूकदर्शक बनी रही जबकि यह आंदोलन उन्हीं के धुर विरोधियों के राज्य में चल रहा था.

Advertisement

12 अगस्त को आंदोलन के 19वें दिन छात्र नेता रवींद्र पासवान ने सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत की अपील की और टीडीपीएल से जुड़ी सभी परीक्षाएं रद्द करने की मांग दोहराई. 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर देवेंद्र महतो अस्पताल से तिरंगा यात्रा में शामिल होने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया. इसी दिन डॉक्टरों ने बताया कि 14 दिन के अनशन के बाद महतो का सोडियम स्तर घट गया था. उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति की भी हालत गंभीर बनी रही और उन्हें फ्लूइड चढ़ाकर रखा गया.

यह भी पढ़ें: छात्रों की बड़ी जीत, JSSC-CGL परीक्षा रद्द; सीएम हेमंत सोरेन ने खुद किया ऐलान, देखें

17 अगस्त को बाबूलाल मरांडी ने जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन पर एमएमडीआर संशोधन विधेयक के विरोध को "राजनीतिक नाटक" बताते हुए छात्र आंदोलन से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया. उसी दिन रवींद्र पासवान ने चेतावनी दी कि अगर 18 अगस्त तक मांगें नहीं मानी गईं तो हजारों छात्र 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे.

आखिरकार सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य सचिवालय में लंबी कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने के बाद बड़ा फैसला लिया. जेएसएससी-सीजीएल यानी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द करने का. इसके साथ ही सरकार ने भर्ती परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए एक सुधार समिति भी बनाई है, जिसकी अगुवाई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल करेंगे.

Advertisement

बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक था, जिसे सरकार ने अब पूरा कर दिया है. यह परीक्षा लंबे समय से छात्रों के विरोध का केंद्र बनी हुई थी.

इसके अलावा सरकार ने एक और अहम फैसला लिया है. जिस आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी टीडीपीएल को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसके द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं को भी रद्द कर दिया गया है. साथ ही इस एजेंसी ने जो भी परिणाम जारी किए थे, उन्हें भी निरस्त कर दिया गया है.

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अब नई समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देगी, ताकि आगे ऐसी गड़बड़ियां दोबारा न हों. यह फैसला उन छात्रों के लिए राहत की खबर है, जो लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे थे.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »