भारतीय रेलवे में बीते ढाई दशकों के दौरान हादसों की रफ्तार भले ही थमी हो, लेकिन जब-जब पटरियों पर ट्रेनें पटरी से उतरी हैं, तब-तब जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. 'इंडिया टुडे ग्रुप' द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2000 से लेकर जुलाई 2026 तक देश में 4,003 बड़े रेल हादसे दर्ज किए गए. इन दुर्घटनाओं में कम से कम 3,594 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जबकि 6,900 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए.
आंकड़ों का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि हादसों की संख्या घटने के बावजूद भीषण हादसों में होने वाली मौतों और घायलों का आंकड़ा लगातार चिंताजनक बना हुआ है.
असल में मौतों और घायलों की संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि रेलवे के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) के पास शुरुआती चार वर्षों (2000-01 से 2003-04) के जान-माल के नुकसान का डेटा उपलब्ध नहीं था.
यह रिपोर्ट दो बड़े रुझान दर्शाती है कि बीते 26 वर्षों में ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में तो भारी कमी आई है, लेकिन जब भी कोई बड़ा हादसा हुआ, उसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ.
हादसे कम हुए, लेकिन जानलेवा साबित हुए
आंकड़ों से पता चलता है कि दुर्घटनाओं की संख्या घटने का मतलब यह नहीं रहा कि मौतों और घायलों की संख्या में भी उसी अनुपात में कमी आई हो.
सबसे दर्दनाक साल (2010-11): उपलब्ध रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा 381 मौतें 2010-11 में दर्ज की गईं, जबकि उस साल 141 बड़े हादसे हुए थे.
2011-12 और 2014-15: साल 2011-12 में 131 हादसों में 319 लोगों की मौत हुई और 716 घायल हुए, वहीं 2014-15 में 135 हादसों में 292 लोगों ने जान गंवाई.
हादसे कम, नुकसान ज्यादा (2023-24): इसका सबसे ताजा उदाहरण 2023-24 में देखने को मिला. हालांकि इस दौरान सिर्फ 40 हादसे हुए, लेकिन इनमें 320 लोगों की मौत हुई और 749 लोग घायल हुए. घायलों का यह आंकड़ा पूरे रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा था. इसका मुख्य कारण जून 2023 में ओडिशा के बालासोर में हुआ ट्रिपल-ट्रेन हादसा था, जो हाल के दशकों की सबसे भीषण रेल दुर्घटनाओं में से एक था.
समय के साथ बदला हादसों का आंकड़ा
2004-05 से 2008-09: बड़े हादसों की संख्या 234 से घटकर 177 पर आई, लेकिन मौतों का सालाना आंकड़ा 191 से 315 के बीच बना रहा.
2017-18 से 2020-21 (सुधार का दौर): इस दौरान सुरक्षा में बड़ा सुधार देखा गया। हादसों की संख्या 73 से घटकर 22 रह गई और मौतों का आंकड़ा 58 से घटकर मात्र 4 पर आ गया
2024-25 और 2025-26: बालासोर हादसे के बाद स्थिति में सुधार हुआ और मौतों का आंकड़ा घटकर क्रमशः 18 और 17 पर आ गया.
2026-27 (31 जुलाई 2026 तक): इस अवधि में कुल 3 हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 5 लोगों की मौत हुई और 4 लोग घायल हुए.
कई सरकारों और रेल मंत्रियों का कार्यकाल
बीते 26 वर्षों का यह डेटा ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, दिनेश त्रिवेदी, मुकुल रॉय, सी.पी. जोशी, पवन कुमार बंसल, मल्लिकार्जुन खड़गे, डी.वी. सदानंद गौड़ा, सुरेश प्रभु, पीयूष गोयल और अश्विनी वैष्णव जैसे कई रेल मंत्रियों के कार्यकाल को कवर करता है.
लंबे समय के आंकड़े यह साफ दिखाते हैं कि रेल दुर्घटनाओं की कुल संख्या में तो बड़ी गिरावट आई है, लेकिन हादसों की कम संख्या हमेशा कम मौतों की गारंटी नहीं देती, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण 2023-24 का साल रहा.
बिश्वजीत