देश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश और इसकी वजह से जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. गुजरात, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर में नदियां और नाले उफान पर हैं, सड़कें पानी में डूब गई हैं और कई रिहायशी इलाकों में घरों और दुकानों के भीतर तक पानी पहुंच गया है.
साउथ गुजरात में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े हैं, जहां करीब 1,200 लोगों को बचाया गया है और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. वहीं महाराष्ट्र के पालघर और वसई में कई फीट पानी भरने से जनजीवन ठप हो गया है. जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के बाद फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं.
पीएम मोदी ने गुजरात सीएम भूपेंद्र पटेल से ली स्थिति की जानकारी
गुजरात में भारी बारिश से बने हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से फोन पर बात की और स्थिति की जानकारी ली. प्रधानमंत्री ने राहत, बचाव और नागरिकों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी बातचीत की. अमित शाह ने वलसाड समेत बारिश प्रभावित इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति का जायजा लिया तथा राज्य को सभी जरूरी संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है.
वलसाड सबसे अधिक प्रभावित
दक्षिण गुजरात का वलसाड जिला बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. उमरगांव तालुका में बुधवार सुबह छह बजे से गुरुवार सुबह दस बजे तक 1,100 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई. जिले के कई अन्य तालुकों में भी इसी अवधि के दौरान 600 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई. वापी, गुंजन विस्तार, डुंगरी फलिया, वापी टाउन और वापी रेलवे अंडरपास समेत कई इलाकों में भारी जलभराव है. सड़कों पर खड़ी सैकड़ों कारें पानी में डूब गई हैं. कई जगह केवल गाड़ियों की छत ही दिखाई दे रही है. स्कूल बसें भी पानी में फंसी नजर आईं, जबकि दुकानों, घरों और कॉलोनियों के भीतर तक सैलाब पहुंच गया है.
बेसमेंट में भर गया बारिश का पानी
वलसाड की कई सोसाइटियों और अपार्टमेंट के बेसमेंट में पानी भर गया है. पार्किंग में खड़ी गाड़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं. 22 जुलाई को वलसाड में केवल दस घंटे के दौरान 243 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी. लगातार बारिश के कारण शहर की सड़कें समंदर जैसी दिखाई देने लगीं और वाहन जहां-तहां फंस गए. राहत आयुक्त गौरांग मकवाना के मुताबिक बारिश की तीव्रता को देखते हुए आपदा प्रबंधन कर्मियों की तैनाती बढ़ाई जा रही है. प्रशासन, पुलिस और लोकल वॉलिंटियर के साथ तालमेल बनाकर बचाव अभियान चलाया जा रहा है.
कई जिलों में चलाया गया राहत और बचाव कार्य
गुजरात में अब तक करीब 1,200 लोगों को बचाया गया है. सूरत में लगभग 1,500 निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि नवसारी जिले में कावेरी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद 11 गांवों में फंसे करीब 200 लोगों को बचाया गया. तापी जिले में बारिश से संबंधित एक व्यक्ति की मौत हुई है. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय वायुसेना और तटरक्षक बल को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए अलर्ट पर रखा गया है. अधिकारियों के अनुसार मौसम में सुधार होने पर जरूरत पड़ने की स्थिति में लोगों को हवाई मार्ग से भी निकाला जाएगा.
सड़कों पर भी कई फीट भरा पानी
सूरत शहर और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं. उधना-नवसारी मुख्य मार्ग पर कई फीट पानी भर गया, जिससे लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी हुई. उमरपाड़ा, बारडोली, महुवा, कामरेज, अंबिका और पलसाना समेत कई तालुकों में भारी बारिश दर्ज की गई है. पांडेसरा क्षेत्र में दमकल विभाग की टीमों ने नावों की मदद से 40 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. सूरत में दो एनडीआरएफ और पांच एसडीआरएफ टीमें तैनात हैं, जबकि वलसाड में एनडीआरएफ की दो और एसडीआरएफ की चार टीमें राहत कार्यों में जुटी हैं.
अंबिका नदी खतरे के निशान से दो फीट ऊपर
नवसारी और डांग जिलों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. लगातार बारिश के कारण डांग की अंबिका नदी खतरे के निशान से दो फीट ऊपर बह रही है, जबकि कावेरी नदी का जलस्तर डेंजर लेवल से चार फीट ऊपर पहुंच गया है. कई डैम ओवरफ्लो हो रहे हैं और 17 से अधिक गांवों में अलर्ट जारी किया गया है. स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है और कई रास्तों को बंद करना पड़ा है. मुख्यमंत्री ने सूरत और नवसारी के जिलाधिकारियों को निचले तथा जलभराव वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने का निर्देश दिया है.
अहमदाबाद के कई अंडरपास बंद
अहमदाबाद में भी गुरुवार सुबह से मूसलाधार बारिश जारी रही. कई रिहायशी सोसाइटियों में पानी भर गया और कई अंडरपास बंद करने पड़े. मानेकबाग चौराहे पर कमर तक पानी जमा हो गया. भारी बारिश के कारण दक्षिण गुजरात के रेल मार्गों पर पानी बढ़ने से मुंबई जाने वाली कई ट्रेनों को रद्द या बीच रास्ते तक संचालित किया गया.
पश्चिम रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क शुरू किया. नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा और सागबारा तालुकों में कई गांवों का संपर्क टूट गया और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई. पूरे राज्य में 300 से अधिक सड़कें अस्थायी रूप से बंद हुईं, राज्य परिवहन की 200 से ज्यादा बस यात्राएं प्रभावित हुईं और कई क्षेत्रों में बिजली गुल रही.
कई जिलों में शुक्रवार को भी बारिश का रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने वलसाड, नवसारी, डांग, सूरत और तापी के लिए गुरुवार और शुक्रवार को बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है. पंचमहल, दाहोद और महीसागर में भी रेड अलर्ट है. इसके अलावा 11 जिलों के लिए ऑरेंज और दस जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. दक्षिण गुजरात में औसत मौसमी बारिश का 62 प्रतिशत से अधिक पानी बरस चुका है, जबकि पूरे राज्य में अब तक वार्षिक औसत की करीब 36 प्रतिशत बारिश दर्ज हुई है.
महाराष्ट्र में भी बारिश ने रोकी रफ्तार
महाराष्ट्र में भी भारी बारिश ने कई शहरों की रफ्तार रोक दी है. पालघर जिले के दहानू क्षेत्र की रिहायशी कॉलोनियां पानी में डूब गई हैं. सड़कों पर तीन से चार फीट तक तेज बहाव के साथ पानी बह रहा है. दहानू बस डिपो पूरी तरह जलमग्न हो गया है. कंक्राटी रोड और ईरानी रोड पानी में डूबे हैं, दुकानों के अंदर पानी घुस गया है और कई अपार्टमेंट का ग्राउंड फ्लोर जलमग्न हो गया है. लोग कमर तक पानी के बीच रोजमर्रा के जरूरी काम करने के लिए मजबूर हैं.
वसई और नालासोपारा में भारी जलभराव
वसई और नालासोपारा में भी लगातार दो दिनों की बारिश के बाद निचले इलाकों में भारी जलभराव है. नालासोपारा पूर्व के गाला नगर में रिक्शा और दूसरी गाड़ियां पानी में तैरती हुई दिखाई दीं. प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और सतर्कता बरतने की अपील की है. नासिक में पिछले दो दिनों से जारी बारिश के कारण गोदावरी नदी का जलस्तर बढ़ गया. एक व्यक्ति नदी के बीच फंस गया, जिसे बचाने के लिए दमकल विभाग ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. डारना और गंगापुर बांध से पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर और बढ़ने की आशंका है.
जम्मू-कश्मीर- रियासी में चिनाब का बढ़ा जलस्तर
जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश का असर फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के रूप में सामने आया है. रियासी में चिनाब और अन्य नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने के बाद सलाल डैम के गेट खोलने पड़े. बगलिहार डैम के सभी गेट भी खोल दिए गए. एनएचपीसी सलाल ने चिनाब का जलस्तर खतरे के स्तर पर पहुंचने के कारण लोगों को नदी किनारे जाने से बचने की सलाह दी है.
राजौरी में लगातार बारिश के बाद पहाड़ी इलाकों में सैलाब का रौद्र रूप दिखाई दिया. डोडा में भूस्खलन के दौरान पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर गिरे और एक गाड़ी बोल्डर की चपेट में आ गई. गाड़ी का अगला हिस्सा मलबे से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. रेस्क्यू टीम ने रस्सियों की सहायता से वाहन को खतरे वाले क्षेत्र से बाहर निकाला. गुरेज और श्रीनगर के तेलबल इलाके में भी नदी-नाले उफान पर हैं और बचाव दल राहत कार्यों में जुटे हैं.
बांदीपोरा में बाढ़ से महिला की मौत
बांदीपोरा में बाढ़ के कारण एक महिला की मौत हो गई. बचाव दल ने उफनती लहरों के बीच काफी मशक्कत के बाद उसका शव बाहर निकाला. जम्मू-कश्मीर में बारिश और बाढ़ से अब तक 25 से अधिक लोगों की जान जाने और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है. बिगड़े हालात के बीच एसडीआरएफ की अगुवाई में कई एजेंसियां राहत और बचाव अभियान चला रही हैं.
आजतक ब्यूरो