70 साल के कश्मीर सिंह ने प्रशासन से शिकायत की थी. उनका कहना है कि प्रतिबंधों की वजह से वह और उनकी बीमार पत्नी तीन दिनों तक कमरे से बाहर नहीं निकल सके. पिछले महीने जब उन्हें एक टावर के पास से हटाया गया और ‘अनधिकृत प्रवेश’ का आरोप लगाया गया, तो मामले ने और तूल पकड़ लिया.
महिंद्रा ऑरा में 141 EWS फ्लैट धारक हैं, जबकि मुख्य टावरों में 799 फ्लैट मालिक हैं. RWA ने करीब दो साल पहले EWS निवासियों के लिए सेंट्रल पार्क और खेल सुविधाओं के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. इसके अलावा RWA सदस्यता, पावर बैकअप और कार पार्किंग जैसे मुद्दे भी विवाद का हिस्सा हैं.
मुख्य टावर के निवासियों का कहना है कि उनके बिक्रीनामा में EWS निवासियों को कुछ साझा सुविधाओं से अलग रखा गया है. उनका यह भी तर्क है कि वे करीब 11 हजार रुपये महीने का मेंटेनेंस देते हैं. वहीं EWS निवासियों का कहना है कि वे अतिरिक्त मेंटेनेंस देने को तैयार हैं, लेकिन पार्क और रास्तों पर रोक बुनियादी आवाजाही का सवाल है.
प्रशासन ने तुरंत प्रतिबंध हटाने के गिए निर्देश
जिला रजिस्ट्रार, फर्म्स एंड सोसाइटीज, गुरुग्राम ने RWA को EWS निवासियों पर लगाए गए प्रतिबंध तत्काल हटाने का निर्देश दिया है. आदेश में बुजुर्गों और बीमार लोगों को पार्क और रास्तों से दूर रखने को गंभीर मामला बताते हुए EWS निवासियों को अंदर के रास्तों और पार्क तक पहुंचने देने की बात कही गई है.
हालांकि RWA ने वर्ग-भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है. RWA पदाधिकारियों का कहना है कि सोसाइटी चलाने में भारी खर्च होता है. उन्होंने EWS ब्लॉक पर करीब 7 लाख रुपये के मेंटेनेंस बकाये का भी दावा किया है.
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RWA ने आदेश के खिलाफ चंडीगढ़ में अपील की तैयारी शुरू कर दी है. दूसरी ओर प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश के बावजूद EWS निवासियों की आवाजाही रोकी गई तो HRRS अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है.
इस पूरे विवाद के बीच कश्मीर सिंह की मांग बेहद साधारण है. अपनी बीमार पत्नी के साथ बिना रोक-टोक पार्क में कुछ कदम टहलना. अब देखना है कि सोसाइटी के नियम और EWS निवासियों के बुनियादी अधिकारों के बीच यह टकराव आगे किस मोड़ पर पहुंचता है.
नीरज वशिष्ठ