IIT दिल्ली में बनी ये डिवाइस घटाएगी पुरानी डीजल गाड़ियों से होने वाला पॉल्यूशन, 90 फीसदी घटेगा प्रदूषण

केंद्र सरकार ने पुराने डीजल ट्रक और बसों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (RECD) को मंजूरी दी है. यह डिवाइस PM उत्सर्जन में 90% और NOx उत्सर्जन में 60% तक कमी लाने में सक्षम है.

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस के बारे में पूरी जानकारी दी है केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस के बारे में पूरी जानकारी दी है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:37 PM IST

पुराने डीजल ट्रक और बसों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार एक नई तकनीक को मंजूरी देने की तैयारी कर रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि पुराने डीजल वाहनों में कम कीमत वाली एक खास उत्सर्जन नियंत्रण डिवाइस लगाई जा सकेगी. दावा है कि इससे पार्टिकुलेट मैटर यानी PM उत्सर्जन में 90 फीसदी तक और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) के उत्सर्जन में करीब 60 फीसदी तक कमी आ सकती है.

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इस तकनीक की खास बात इसकी कीमत है. रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (RECD) की कीमत करीब 4,000 से 5,000 रुपये हो सकती है. यानी प्रदूषण कम करने के लिए पूरे पुराने वाहन को बदलकर नया BS-VI वाहन खरीदने के मुकाबले यह काफी सस्ता विकल्प हो सकता है. गडकरी ने गुरुवार को सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के एक कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस टेक्नीक की टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है. इसे IIT दिल्ली में हुए एक इनोवेशन के आधार पर डेवलप किया गया है.

BS-III और BS-IV वाहनों में भी लग सकेगी डिवाइस

सरकार की योजना के मुताबिक, RECD को BS-III, BS-IV और इससे भी पुराने डीजल वाहनों में लगाया जा सकेगा. इसका मकसद पुराने वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों की मात्रा को काफी कम करना है. सरकार की ओर से शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, डिवाइस लगाने के बाद पुराने डीजल वाहनों के उत्सर्जन स्तर को BS-VI वाहनों के करीब लाया जा सकता है. हालांकि इसका मतलब पुराने वाहन का तकनीकी रूप से BS-VI व्हीकल में बदल जाना नहीं है, बल्कि उसके उत्सर्जन को आधुनिक मानकों के करीब लाने की कोशिश है.

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क्या है RECD और कैसे करता है काम?

RECD यानी Retrofit Emission Control Device एक ऐसी प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली है, जिसे पहले से इस्तेमाल हो रहे डीजल इंजन के एग्जॉस्ट सिस्टम में लगाया जाता है. ऐसी तकनीक का इस्तेमाल डीजल जनरेटर सेट में भी किया जा चुका है. इसे आसान भाषा में डीजल इंजन के धुएं के लिए 'एयर प्यूरीफायर' जैसा समझा जा सकता है. इंजन से निकलने वाला प्रदूषित धुआं सीधे हवा में जाने के बजाय पहले इस डिवाइस से गुजरता है. यह कालिख और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों को कम करने के साथ नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे हानिकारक उत्सर्जन को भी घटाने में मदद करता है.

यानी इंजन पुराना ही रहता है, लेकिन उसके एग्जॉस्ट से निकलने वाले प्रदूषण को डिवाइस के जरिए कम किया जाता है.

AIS-228 लाने की तैयारी

इस तकनीक को वाहनों में इस्तेमाल करने का रास्ता साफ करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय Automotive Industry Standard-228 (AIS-228) को नोटिफाई करने की तैयारी कर रहा है. इसमें RECD के लिए तकनीकी मानक और प्रदर्शन से जुड़ी जरूरी शर्तें निर्धारित की जाएंगी. सरकार का यह कदम देश में पहले से चल रहे पुराने भारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने की कोशिश का हिस्सा है. अभी सरकार पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप करने और उनकी जगह नए वाहन लाने को भी बढ़ावा दे रही है.

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