केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों के दो महीने के संग्राम के बाद अपना इस्तीफा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्होंने अपना इस्तीफा भेजा. छात्र आंदोलन, विपक्ष के लगातार दबाव और सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद आखिरकार यह फैसला आया. सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि मामला शिक्षा व्यवस्था के विरोध से बढ़कर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पहुंच गया?
पूरे विवाद की शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा से हुई. परीक्षा के बाद पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए. सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी और परीक्षा रद्द कर 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया. लेकिन तब तक लाखों छात्रों और उनके परिवारों में परीक्षा व्यवस्था को लेकर भरोसा कमजोर पड़ चुका था.
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मई के आखिर में एक सरकारी अधिकारी की टिप्पणी ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया. बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' से किए जाने के बाद अभिजीत दिपके ने व्यंग्य के तौर पर Cockroach Janta Party (CJP) की शुरुआत की. देखते ही देखते यह सोशल मीडिया अभियान देशव्यापी छात्र आंदोलन में बदल गया. संगठन ने शुरुआत से ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग उठाई.
जंतर-मंतर बना आंदोलन का केंद्र
जून की शुरुआत में CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया. हजारों छात्र देशभर से दिल्ली पहुंचे. 'थाली-चम्मच' बजाकर विरोध प्रदर्शन किया गया. कुछ ही दिनों में आंदोलन मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत कई शहरों तक फैल गया. इसी दौरान पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े और उन्होंने जंतर-मंतर पर अनशन शुरू कर दिया. उनके जुड़ने से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा समर्थन मिला. उन्होंने 26 दिनों तक अनशन किया.
संसद से सड़क तक बढ़ा दबाव
20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. कई छात्र घायल हुए. इसके बाद विपक्ष ने संसद के मानसून सत्र में सरकार को घेरना शुरू कर दिया. कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन ने लगातार कई दिनों तक संसद में हंगामा किया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई.
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21 जुलाई को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नतृत्व में विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी के घर के पास प्रदर्शन किए. 23 जुलाई को जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं. इसी दिन विपक्षी नेताओं ने भी सरकार पर दबाव बढ़ाया.
सरकार से कई दौर की CJP की बातचीत
सरकार ने आंदोलन खत्म कराने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी. पहली बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सीजेपी के प्रवक्ताओं से मिलकर उनकी बातें सुनीं. 24 जुलाई को संविधान क्लब में CJP प्रतिनिधियों और सरकार (जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह) के बीच अहम बैठक हुई.
CJP ने तीन प्रमुख मांगें रखीं- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेना. सरकार ने मुआवजे और कानूनी मामलों पर सकारात्मक रुख दिखाया, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए 24 घंटे का समय मांगा.
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25 जुलाई की सुबह CJP ने साफ कर दिया कि अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो आगे की बातचीत का कोई मतलब नहीं रहेगा. कुछ ही घंटे बाद धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया.
अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी विवाद से ऊपर है और वह नहीं चाहते कि युवाओं की पढ़ाई और भविष्य कानूनी व राजनीतिक विवादों में उलझे. उन्होंने यह भी कहा कि देश की एकता और छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों ने जश्न मनाया. विपक्ष ने इसे युवाओं की जीत बताया, जबकि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे CJP और सोनम वांगचुक ने कहा कि जवाबदेही तय होने के बाद अब असली लड़ाई शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू कराने की है.
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