स्कूल जाओ, हंसो-खेलो और सपने देखो...’, दोषी को सख्त सजा सुनाने के बाद जज ने मासूम को लिखी चिट्ठी, हाईकोर्ट ने भी की तारीफ

आमतौर पर कानून की भाषा सख्त होती है. लेकिन साकेत कोर्ट के एक जज ने अपने फैसले के बाद पीड़ित के लिए जो संवेदना दिखाई वो हर तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है. जज ने पीड़ित के लिए एक चिठ्ठी में कुछ ऐसा लिखा, जिसे हाईकोर्ट ने भी सराहा है. पढ़ें पूरी कहानी.

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जज ने चिट्ठी लिखकर बच्ची को भरोसा दिया (Photo-Representationl) जज ने चिट्ठी लिखकर बच्ची को भरोसा दिया (Photo-Representationl)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:30 PM IST

रेप के एक मामले में साकेत सेशन कोर्ट ने एक दोषी को ऐसी सजा सुनाई, जिसकी तारीफ दिल्ली हाईकोर्ट ने भी की है. अदालत ने दोषी सुमित शाह को POCSO एक्ट के तहत आजीवव कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने आदेश दिया कि उसे बिना किसी रियायत के पूरी जिंदगी जेल में ही रहना होगा.

इस फैसले के आखिर में जज रजनी रंगा ने पीड़ित बच्ची के नाम एक चिट्ठी लिखी. इस संदेश में उन्होंने लिखा , 'बेटा, अब बिना किसी डर के अपनी जिंदगी जियो! स्कूल जाओ, दोस्त बनाओ, हंसो, खेलो और सपने देखो'. इसके साथ कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि दोषी सलाखों के पीछे ही रहेगा. 

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इसके बाद दोषी ने साकेत कोर्ट के इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जज रजनी रंगा के इस मानवीय अंदाज की तारीफ की. हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतों के फैसले अक्सर कानूनी भाषा तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन इस तरह का संदेश पीड़िता को भरोसा देता है. अदालत के मुताबिक ऐसी संवेदनशील बात बच्ची को उस भयावह सदमे से उबरने और समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का हौसला दे सकती है.

तीन साल पुराने मामले में हुई सजा

यह मामला 20023 का है. चार साल की बच्ची के साथ रेप और उसे आपराधिक धमकी देने का मामला अदालत में गया. अब अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए बिना रियायत के आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जजों की नियुक्ति की सिफारिश, कॉलेजियम ने केंद्र को भेजे नाम

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पीड़िता की उम्र अब 7 साल है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी मध्य प्रदेश के एक जघन्य मामले में मौत की सजा को बदलकर दोषी को जीवन की आखिरी सांस तक बिना राहत के जेल में रखने का आदेश दिया था.

इन फैसलों में अदालतों ने गंभीर अपराधों में लंबी अवधि की सजा को लेकर सख्त रुख दिखाया है. अब इस मामले में साकेत कोर्ट के जज द्वारा लिखी यह चिट्ठी काफी चर्चा में हैं. यह पूरी घटना एक उदाहरण है कि कभी-कभी जज के शब्द किसी पीड़ित के लिए भरोसे का सहारा भी बन सकते हैं.

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