दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. देश की राजधानी और उसके आसपास के शहरों की हवा बेहद खराब (Very Poor) श्रेणी में पहुंच गई. दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 334 दर्ज किया गया. इसे देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-2 को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है. मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते आने वाले दिनों में भी प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद कम है. ऐसे में सड़कों की सफाई, पानी के छिड़काव से लेकर वाहनों और उद्योगों पर निगरानी तक बढ़ाई जाएगी.
दो दिन में तेजी से बिगड़ी दिल्ली की हवा
दिल्ली में पिछले दो दिनों के दौरान प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है. 31 अक्टूबर को राजधानी का AQI 117 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है. इसके बाद 1 नवंबर को यह बढ़कर 261 पर पहुंच गया और हवा खराब श्रेणी में चली गई. सोमवार, 2 नवंबर को शाम 4 बजे AQI 324 दर्ज किया गया. इसके साथ ही हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई. मंगलवार सुबह हवा की गुणवत्ता सुधरने की बजाय और खराब हो गई.
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने प्रदूषण बढ़ने के पीछे मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को जिम्मेदार बताया है. आयोग के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी AQI बेहद खराब श्रेणी में रह सकता है. मौसम विभाग (IMD) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटीरियोलॉजी (IITM) के पूर्वानुमानों में भी फिलहाल हवा की गुणवत्ता में सुधार के संकेत नहीं मिले हैं.
GRAP-2 लागू होने से बढ़ी सख्ती
GRAP-2 लागू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए कई उपाय तेज किए जाएंगे. आयोग ने सभी संबंधित एजेंसियों को GRAP के पहले और दूसरे चरण के नियमों का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है. इसके तहत नगर निकायों को मशीनों से सड़कों की सफाई बढ़ाने, धूल ना उड़े इसके लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने और जरूरत के मुताबिक एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है. घरेलू कचरे के साथ निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे का सही तरीके से उठान और निपटान भी सुनिश्चित करना होगा. खुले में कचरा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नजर
प्रदूषण कम करने के लिए ट्रैफिक व्यवस्था पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है. प्रमुख चौराहों और व्यस्त सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है, ताकि जाम की स्थिति न बने. जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण बढ़ाता है, इसलिए यातायात को सुचारु रखने पर जोर दिया जा रहा है. इसके अलावा वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच तेज कर दी गई है. जिन गाड़ियों से ज्यादा धुआं निकलता दिखाई दे रहा है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों पर लागू प्रतिबंधों का भी सख्ती से पालन कराया जा रहा है.
कोयला-लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक
GRAP-2 के तहत उद्योगों, ईंट भट्ठों और बिजली संयंत्रों की भी जांच बढ़ाई गई है. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि ये प्रतिष्ठान प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन करें और केवल मंजूर ईंधन का इस्तेमाल करें. होटल, रेस्टोरेंट और सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानें भी निगरानी के दायरे में हैं. इन्हें तंदूर में कोयले और लकड़ी का इस्तेमाल बंद करने और बिजली या गैस से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने को कहा गया है.
कब कैसे लागू होता है GRAP चरण?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान प्रदूषण से निपटने की एक आपात व्यवस्था है. इसके तहत हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के साथ ही अलग-अलग चरणों में पाबंदियां और नियंत्रण के उपाय लागू किए जाते हैं. GRAP-1: AQI 201 से 300 के बीच होने पर लागू होता है. इसे खराब श्रेणी माना जाता है. GRAP-2: AQI 301 से 400 के बीच होने पर लागू होता है. यह बेहद खराब श्रेणी है. GRAP-3: AQI 401 से 450 के बीच होने पर लागू होता है. इसे गंभीर श्रेणी कहते हैं. GRAP-4: AQI 450 से ऊपर जाने पर लागू किया जाता है.
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने सितंबर में GRAP के नियमों में बदलाव किया था. इसके तहत GRAP-3 के दौरान लागू होने वाली कुछ वाहन पाबंदियों का दायरा हरियाणा के सोनीपत तक बढ़ा दिया है. पहले बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल या इससे पुराने हल्के मोटर वाहनों पर ये प्रतिबंध गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में लागू थे. संशोधन के बाद सोनीपत को भी इस सूची में शामिल कर लिया गया. फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निगरानी और कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं.
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