'मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं कर सकते...', CJP प्रोटेस्ट पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की 10 बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में CJP द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शन पर लगी पाबंदियों की समीक्षा की. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मेट्रो, रेलवे और सड़कों को बंद करने के फैसले पर चिंता जताई और कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं.

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राजधानी दिल्ली में सीजेपी प्रोटेस्ट को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट पर है राजधानी दिल्ली में सीजेपी प्रोटेस्ट को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट पर है

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:09 PM IST

दिल्ली में CJP की ओर से बुलाए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर लगाई गई पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट मे शुक्रवार को सुनवाई की. इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मेट्रो स्टेशन, रेलवे सेवाओं और सड़कों को बंद करने के फैसले पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन आम नागरिकों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं होनी चाहिए. सीजेआई ने आनुपातिकता के सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि किसी स्थिति को रोकने के लिए उतने ही उपाय किए जाने चाहिए, जितने जरूरी हों. इसके लिए 'मक्खी मारने के लिए  हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.'

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सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर पाबंदियां लगाई गई हैं और स्थिति के मुताबिक इनकी समीक्षा की जाएगी. 

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की 10 बड़ी बातें

1. 'मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं कर सकते'
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हर नागरिक के मामले में आनुपातिकता (Proportionality) का सिद्धांत लागू होता है. किसी स्थिति को रोकने के लिए कदम उठाना जरूरी हो सकता है, लेकिन कार्रवाई केवल उतनी ही होनी चाहिए, जितनी जरूर है. उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल किया जाए. 

2. मेट्रो बंद करने और फ्रीक्वेंसी घटाने में अंतर
जस्टिस बागची ने रेलवे और मेट्रो के नोटिस का संज्ञान लेते हुए कहा कि मेट्रो के नोटिस में विरोधाभास है. एक तरफ ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी कम करने की बात कही गई है, जबकि दूसरी तरफ सेवाएं बंद करने का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि फ्रीक्वेंसी कम करना सेवाओं को कंट्रोल करना है, जबकि पूरी तरह बंद करना प्रतिबंध है. इस नोटिस पर दोबारा विचार करने की जरूरत है. 

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3. नोएडा-गुरुग्राम से आने वाले यात्रियों की चिंता
सीजेआई ने कहा कि नोएडा, गुरुग्राम और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग नौकरी और पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं. ऐसे में मेट्रो स्टेशनों को बंद करने से आम नागरिकों को परेशानी होगी. बच्चों, छात्रों और सीनियर सिटीजन की आवाजाही पर असर नहीं पड़ना चाहिए. 

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4. मेट्रो, ट्रेन और सड़कें बंद करने पर सरकार से बात करेंगे SG
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद करने और परिवहन सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर वह सरकार से बातचीत करेंगे. उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने तक एहतियाती कदम उठाए गए हैं. 

5. सड़कों पर बैरिकेडिंग की भी समीक्षा हो
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने कहा कि जगह-जगह बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद कर दिए गए हैं. इस पर सीजेआई ने कहा कि सड़कों को बंद करने के फैसले की भी समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर किसी रास्ते पर बैरिकेडिंग की गई है, तो लोगों को वैकल्पिक मार्ग की जानकारी दी जानी चाहिए. 

6. 'पुलिस को नागरिकों को प्रदर्शन में जाने से रोकने का अधिकार नहीं'
वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी पीजी, हॉस्टल और अन्य परिसरों में जाकर युवाओं को बाहर नहीं निकलने और प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के लिए कह रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इससे डर का माहौल नहीं बनता? वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होना या नहीं होना नागरिक का अपना फैसला है. पुलिस को लोगों से यह कहने का अधिकार नहीं है कि वे प्रदर्शन में शामिल न हों. 

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7. शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए अलग बड़ी जगह देने का सुझाव
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल किया कि क्या शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के लिए कोई दूसरी बड़ी जगह निर्धारित नहीं की जा सकती, जहां प्रदर्शन की अनुमति दी जा सके? सुनवाई के दौरान वकीलों ने कहा कि राजनीतिक रैलियों में लाखों लोग दिल्ली आते हैं, लेकिन उन्हें नहीं रोका जाता. इस पर सीजेआई ने कहा कि ऐसी रैलियां पुलिस की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था के साथ होती हैं.

कपिल सिब्बल ने कहा कि प्रदर्शन के लिए तय की जाने वाली जगह पर मेट्रो और ट्रेन की कनेक्टिविटी के साथ पानी, भोजन, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा की सुविधाएं होनी चाहिए.

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8. 'संसद देश की संप्रभुता का प्रतीक है'- तुषार मेहता
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शनकारी संसद की ओर जाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि संसद कोई राजनीतिक इमारत नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता का प्रतीक है.
मेहता ने दावा किया कि पहले भी प्रदर्शनकारियों ने सीमित समय के लिए अनुमति ली थी, लेकिन निर्धारित समय से ज्यादा दिनों तक प्रदर्शन जारी रखा. उन्होंने बताया कि 20 जून को आयोजकों ने प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी और लिखित आश्वासन दिया था कि वे अगले दिन जगह खाली कर देंगे. हालांकि, प्रदर्शन 17 दिनों तक चला, जबकि अनुमति केवल एक दिन के लिए शाम 5 बजे तक दी गई थी.

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उन्होंने दावा किया कि पिछले हिंसक प्रदर्शनों में 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे. महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी और छेड़छाड़ भी की गई थी. मेहता ने कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन आसपास रहने वाले लोगों के प्रति भी जिम्मेदारी होती है.

9. 'पूरी दिल्ली ठप होने की तस्वीर पेश की जा रही है'
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ऐसा दिखाया जा रहा है, जैसे पूरा शहर ठप हो गया हो. उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर प्रतिबंध केवल रायसीना, राष्ट्रपति भवन और उसके चार किलोमीटर के दायरे में लगाया गया है. स्थिति के मुताबिक इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी जाएंगी.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी प्रदर्शन में असामाजिक या राष्ट्रविरोधी तत्वों के शामिल होने की आशंका हो, तो सुरक्षा एजेंसियों को उचित कदम उठाने की छूट मिलनी चाहिए. इस पर सीजेआई ने कहा कि सरकार के पास सीसीटीवी कैमरे और अन्य सुरक्षा उपाय उपलब्ध हैं, लेकिन आम नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने का अधिकार भी है.

10. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सबसे पहले उन आम यात्रियों की आवाजाही और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुंच के मुद्दे पर विचार कर रहा है, जिनका विरोध प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है.
जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत विरोध प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करती है और नागरिकों की आवाजाही तथा जरूरी सुविधाओं तक पहुंच के मुद्दे पर आदेश पारित करेगी.
 

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