BRICS पर इस समय दुनियाभर की निगाहें हैं. अमेरिका से लेकर यूरोप के अखबारों में इसे अलग-अलग तरीके से कवर किया गया है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि नई दिल्ली में हुआ BRICS शिखर सम्मेलन उच्च गुणवत्ता वाले और अधिक व्यापक BRICS सहयोग के लिए स्पष्ट दिशा देता है. रिपोर्ट के मुताबिक, BRICS शिखर सम्मेलन से इतर शनिवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बैठक ने दोनों देशों के संबंधों को विश्वास निर्माण के एक नए चरण में पहुंचाया है.
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. यह लगातार तीसरा वर्ष है जब चीन और भारत के नेताओं की मुलाकात हुई है. इससे पहले 2024 में कज़ान और 2025 में तियानजिन में दोनों नेताओं की बैठक हुई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में लगातार स्थिरता को रेखांकित करता है.
पेकिंग यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज के कार्यकारी उप निदेशक वांग शू ने शनिवार को ग्लोबल टाइम्स से कहा कि अगर कज़ान बैठक को एक निर्णायक मोड़ माना जाए और तियानजिन बैठक ने संबंधों को फिर से स्थिर रास्ते पर लाने में मदद की, तो नई दिल्ली में हुई बैठक को विश्वास निर्माण के एक नए चरण के तौर पर देखा जा सकता है. इसका फोकस रणनीतिक सहमति को ठोस तंत्र और परिणामों में बदलने पर है.
सीमा प्रबंधन से सीधी उड़ानों तक हुई प्रगति
रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा प्रबंधन पर हुए समझौते, सीमा व्यापार की बहाली, सीधी उड़ानों की बहाली और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क जैसी हालिया प्रगति इस गति का ठोस प्रमाण देती है. वांग ने कहा कि नेताओं के स्तर पर बातचीत का मुख्य महत्व व्यापक संबंधों को सही दिशा में बनाए रखना, मतभेदों को संभालना और गलत आकलन के जोखिम को कम करना है.
वांग ने कहा कि दो बड़े देशों के बीच राजनीतिक विश्वास ठोस कदमों के जरिए बनता है. उन्होंने कहा कि संबंधों को बहाल करने के लिए कुछ क्षेत्रों में और प्रयास किए जा सकते हैं. इनमें सीमा मुद्दे के प्रबंधन के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करना, लोगों के बीच और व्यावहारिक आदान-प्रदान का विस्तार करना, व्यापार और निवेश के सुरक्षा-केंद्रित होने से बचना तथा बहुपक्षीय और क्षेत्रीय मामलों में समन्वय को गहरा करना शामिल है.
BRICS, SCO और G20 के जरिए सहयोग की गुंजाइश
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में वांग के हवाले से कहा गया है कि वैश्विक शासन सुधार, जलवायु परिवर्तन और विकास वित्तपोषण जैसे मुद्दों पर चीन और भारत के पास BRICS, SCO और G20 के माध्यम से समन्वय की व्यापक गुंजाइश है. एक्सपर्ट ने कहा कि सहयोग जितना व्यापक होगा, मतभेदों का महत्व उतना ही कम होगा. इससे द्विपक्षीय संबंधों को अधिक स्थिर और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और वैश्विक स्थिरता में भी योगदान होगा.
aajtak.in