कोरोना महामारी के दौरान चीन को लेकर दुनियाभर में हुई आलोचना का असर उसकी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय रवैये पर भी पड़ा. भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि कैसे महामारी के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद चीन ने बाहरी दुनिया के प्रति सख्त रुख अपना लिया था.
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से की गई आलोचना के कारण चीन का दुनिया के प्रति रवैया कठोर हो गया था. चीन को महसूस हुआ कि महामारी के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और वैश्विक स्तर पर उसकी छवि खराब की जा रही है. इसके चलते चीन ने बाहरी दुनिया के प्रति सख्त रुख अपनाया और अपने देश के भीतर बेहद कठोर लॉकडाउन लागू किया.
विदेश सचिव विक्रम मिसरी शनिवार को मुंबई में आयोजित 'इकवत ग्लोबल बिजनेस कॉन्क्लेव' (Iqwat Global Business Conclave) को संबोधित कर रहे थे. इस कार्यक्रम का आयोजन कश्मीरी पंडितों के एक संगठन ने किया था. मिसरी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान चीन को लगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे महामारी के लिए दोषी ठहरा रहा है और उसे बदनाम किया जा रहा है.
इस वैश्विक आलोचना का असर चीन के रवैये पर पड़ा और उसने बाहरी दुनिया के प्रति कठोर नजरिया अपना लिया. इसके साथ ही चीन ने अपनी सीमाओं के भीतर बेहद सख्त लॉकडाउन संबंधी प्रतिबंध भी लागू किए.
गलवान घाटी में भारत-चीन टकराव का भी किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान विदेश सचिव ने चीन में भारतीय राजदूत के रूप में अपने कार्यकाल को भी याद किया. उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्हें एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था, जब पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच अभूतपूर्व सैन्य टकराव हुआ था. मिसरी ने बताया कि चीन में राजदूत रहते हुए भारत और चीन के बीच पैदा हुआ यह तनाव उनके कार्यकाल की प्रमुख चुनौतियों में से एक था.
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