भारत में होने वाले BRICS समिट को लेकर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बयान पर BJP ने पलटवार किया है. चिदंबरम ने BRICS, SCO, G20 और QUAD में भारत की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इन मंचों से भारत को क्या फायदा मिल रहा है. इस पर बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने उन्हें "नाराज फूफा" बताया.
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम का कहना है, "मुझे नहीं लगता कि पिछले दो या तीन BRICS समिट से कोई ठोस फायदा या ठोस नतीजा मिला है. हम BRICS का हिस्सा हैं, SCO का हिस्सा हैं, G20 का हिस्सा हैं और QUAD का भी हिस्सा हैं. हमें इससे क्या फायदा मिल रहा है? मुझे दिखाई नहीं देता. हालांकि, पहले BRICS समिट से कुछ ठोस फायदे जरूर मिले थे."
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बीजेपी ने चिदंबरम को बताया "नाराज फूफा"
चिदंबरम के बयान पर BJP नेता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पलटवार किया. उन्होंने चिदंबरम को 'नाराज फूफा' बताते हुए कहा, "जब भी भारत में कुछ अच्छा होता है, 'नाराज फूफा' कांग्रेस को उससे परेशानी होने लगती है." भंडारी ने चिदंबरम के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत BRICS समिट की मेजबानी क्यों कर रहा है, इस पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को बेसिक गूगल सर्च कर लेना चाहिए था.
प्रदीप भंडारी ने आगे दावा किया कि BRICS देशों को भारत का एक्सपोर्ट करीब 85 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि विस्तार के बाद BRICS समूह दुनिया की करीब आधी आबादी और करीब 40 फीसदी ग्लोबल GDP का प्रतिनिधित्व करता है. BJP नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को भारत की प्रगति पसंद नहीं है.
12-13 सितंबर को BRICS समिट
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS लीडर्स समिट की मेजबानी करने जा रहा है. भारत इस साल चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. इस बार समिट का मुख्य विषय "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" रखा गया है.
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इस समिट में विस्तारित 11 सदस्यीय BRICS समूह के नेता शामिल होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत दूसरे सदस्य देशों के नेताओं की मेजबानी करेंगे. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी समिट में शामिल होने की उम्मीद है. उनका भारत दौरा 2019 के बाद पहली बार होगा.
BRICS में किन मुद्दों पर चर्चा
दो दिन चलने वाले समिट में बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने और ग्लोबल फाइनेंशियल संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. IMF और वर्ल्ड बैंक में सुधार के साथ-साथ व्यापार में स्थानीय करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी बात होगी. इसके अलावा सप्लाई चेन, खाद्य सुरक्षा और ग्रीन एनर्जी जैसे मुद्दे भी एजेंडे में होंगे. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच BRICS देशों के बीच सहयोग और ग्लोबल साउथ की भूमिका भी इस समिट का अहम हिस्सा रहने वाली है.
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