गोवा के सांता क्रूज में रहने वाले एक परिवार के 6 सदस्यों ने उसी निर्वाचन क्षेत्र में पता बदलने के लिए आवेदन किया था, लेकिन SIR के दौरान उनके नाम हटा दिए गए.
अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने परिवार का नाम हटाने से पहले उन्हें सुनवाई का मौका न देने पर चुनाव आयोग (EC) को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि तकनीक के बजाय कानून का पालन करें. वहीं, चुनाव अधिकारी को कोर्ट में बुलाया गया है.
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और अमित एस. जामसांडेकर की बेंच के सामने सुनवाई शुरू हुई. चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट को बताया कि अगर परिवार SIR के दौरान कहीं और शिफ्ट हुआ है, तो नाम हटा दिया गया होगा और परिवार ने फॉर्म 8 के बजाय फॉर्म 6 भरा होगा. बेंच ने कहा कि हलफनामे में ऐसा कहीं नहीं कहा है कि चुनाव आयोग पूरे सिस्टम को फ्रीज कर सकता है.
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इस बीच, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, RJD सांसद मनोज झा, आइसा (AISA) अध्यक्ष नेहा, सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण और AISA यूपी अध्यक्ष मनीष कुमार ने बुधवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग उठाई.
उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाए जा रहे हैं. इसके विरोध में 2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर नागरिक विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है.
विद्या