चेन्नई, तमिलनाडु से बड़ी खबर है. पूर्व तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष और 'वी द लीडर' आंदोलन के संस्थापक के. अन्नामलाई ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें दिल्ली आकर बड़ी जिम्मेदारी संभालने और वहां तीन साल से ज्यादा समय तक रहने के लिए कहा था. अन्नामलाई ने कहा कि उन्होंने अमित शाह से साफ कह दिया कि यह उनके लिए सही नहीं रहेगा और वे यहीं रहकर लोगों की सेवा करते रहेंगे. इसके अलावा अन्नामलाई ने मेकेदातु बांध विवाद पर भी अपनी राय रखी और तमिलनाडु सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर कड़ी चेतावनी भी दी है.
अन्नामलाई ने कहा कि उन्होंने राजनीति में हमेशा अमित शाह के सिद्धांतों का पालन किया है. उन्होंने कहा कि चाहे वे बीजेपी के अंदर रहें या बाहर, वे तमिलनाडु और सामाजिक बदलाव के लिए काम करते रहेंगे. यह बयान उस समय आया जब पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा चल रही थी.
मेकेदातु बांध मुद्दे पर बोलते हुए अन्नामलाई ने कहा कि उन्होंने हमेशा तमिल लोगों के हितों और बदलाव के लिए आवाज उठाई है. उन्होंने बताया कि जब वे बीजेपी में थे, तब भी तमिलनाडु बीजेपी ने मेकेदातु परियोजना का विरोध किया था.
अन्नामलाई ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी पर पूरा भरोसा है और वे एक ईमानदार नेता हैं जो गलत काम नहीं करते. उन्होंने कहा कि जब कोई मुद्दा दो राज्यों को प्रभावित करता है, तो दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साथ बैठाकर उचित समाधान निकालना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि बेंगलुरु को पीने का पानी मिलना चाहिए, लेकिन तमिलनाडु के हितों की कीमत पर कोई नया बांध नहीं बनना चाहिए.
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इसके बाद अन्नामलाई ने तमिलनाडु सरकार को लेकर बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि सरकार को एक साल का समय दिया जाना चाहिए और उसके कामकाज को देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार ठीक से काम नहीं करती है, तो वे सबसे पहले सवाल उठाएंगे. उन्होंने लोगों से कहा कि जल्दबाजी में हंगामा करने की जरूरत नहीं है और सरकार को काम करने का मौका मिलना चाहिए.
साथ ही अन्नामलाई ने दावा किया कि भ्रष्टाचार रुकने की बात कही गई थी, लेकिन अब फिर से शुरू हो गया है. उन्होंने कहा कि कुछ मंत्री अब रिश्वत लेने लगे हैं और उनके पास इसके ऑडियो सबूत भी हैं. अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि एक साल बाद मुद्दा उठाने से पहले वे अभी उन्हें आगाह कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते हैं, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके मंत्री भी इसी सिद्धांत का पालन करें.
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