वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव जारी है. बीजेपी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को देश का विकास और भारत का बढ़ता गौरव पसंद नहीं आ रहा है.
SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जिन 13 करोड़ वोटरों की बात की जा रही है, उनमें मृतक, दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके और डुप्लीकेट वोटर भी शामिल हैं. उन्होंने कांग्रेस की मॉक पार्लियामेंट पर भी सवाल उठाए हैं.
सुधांशु त्रिवेदी ने SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि जिन 13 करोड़ वोटरों की बात की जा रही है, उनमें करीब 2.80 करोड़ मृतक मतदाता हैं. लगभग 6 करोड़ लोग अपने पुराने पते से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि करीब एक करोड़ डुप्लीकेट वोटर हैं. उन्होंने कहा कि स्थानांतरित होने वाले लोगों में कई मतदाता नई जगह अपना वोट बनवा चुके हैं. बाकी लोगों को यह तय करना है कि वे पुरानी जगह अपना नाम रखना चाहते हैं या नई जगह मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराना चाहते हैं.
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कुछ लोगों को देश का विकास पसंद नही आ रहा है. देश में गरीबी तेजी से घटी है, लेकिन भारत का गौरव कांग्रेस को पसंद नही आ रहा है. तो हम पूछना चाहते हैं कांग्रेस पार्टी से कि जहां आपकी सरकारें है कर्नाटक और केरल में वो सही बोल रहे हैं या आप सही बोल रहे हैं.
वास्तविकता यह है कि जिन 13 करोड़ वोटों की बात की जा रही है, उनमें 2.80 करोड़ मृत वोटर हैं. करीब 12 करोड़ लोग ऐसे थे, जो अपनी जगह छोड़कर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए. इनमें से 6 करोड़ लोगों ने नई जगह पर अपना वोट बनवा लिया. बाकी 6 करोड़ लोगों को तय करना है कि वे पुरानी जगह वोट रखेंगे या नई जगह बनवाएंगे.'
सुधांशु त्रिवेदी ने आगे जोड़ा कि, इसके अलावा 1 करोड़ डुप्लीकेट वोट हैं. यानी जिनके नाम दो जगह वोटर लिस्ट में दर्ज हैं. अब सबसे बड़ा सवाल 3 करोड़ ऐसे वोटरों का है, जिनका कोई पता नहीं चल पाया. ये ऐसे वोटर हैं, जिनके पते पर वे मौजूद नहीं थे. आसपास के लोग भी नहीं बता पाए कि वे वहां कभी रहते थे या नहीं.
मुझे लगता है कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन की पूरी राजनीति इसी मुद्दे पर टिकी हुई है. इन 3 करोड़ लापता वोटरों के रिकॉर्ड पर संदेह है. इनके पास आज कोई कार्ड भी नहीं है. अब सवाल है कि इन लोगों को भी अपना कार्ड दिखाना होगा. इसके बाद ही उनका वोट स्पष्ट हो पाएगा. जो लोग कागजों में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें बता दूं कि यह पूरी प्रक्रिया बेहद पेशेवर तरीके से की गई है.
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