मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कई दिनों से चल रहा किसानों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे किसानों ने सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद धरना समाप्त करने का ऐलान किया. सरकार ने मूंग की MSP पर खरीद बढ़ाने, खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था तत्काल प्रभाव से खत्म करने और किसानों की अन्य मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया. इसके बाद किसानों ने अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया.
पूरे आंदोलन की जड़ मूंग की MSP पर खरीद थी. किसानों का कहना था कि इस साल रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, लेकिन सरकार सीमित मात्रा में ही खरीद कर रही थी. इससे बड़ी संख्या में किसानों को अपनी फसल बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ती.
दूसरी बड़ी शिकायत खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को लेकर थी. किसानों का आरोप था कि इस सिस्टम की वजह से समय पर खाद नहीं मिल रही और खेती प्रभावित हो रही है. इन्हीं मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 19 किसान संगठनों ने आंदोलन शुरू किया था.
सरकार ने 60% खरीद का दिया ऑफर
कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने बीती रात बताया कि केंद्र सरकार ने इस साल 4.52 लाख मीट्रिक टन ग्रीष्मकालीन मूंग खरीद का लक्ष्य तय किया था. पहले किसानों की केवल 25 फीसदी उपज MSP पर खरीदी जानी थी, लेकिन अब हर पात्र किसान की 60 फीसदी उपज खरीदी जाएगी.
नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में इसका मतलब करीब 3 क्विंटल प्रति एकड़ खरीद होगा. सरकार ने स्लॉट बुकिंग की आखिरी तारीख भी 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त और खरीद की अंतिम तारीख 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त कर दी है.
सरकार ने खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन सिस्टम पर भी फिलहाल रोक लगा दी है. कृषि मंत्री ने कहा कि शुरुआती स्तर पर इस व्यवस्था में कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आई हैं. इसलिए कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी, जो व्यवस्था की समीक्षा कर सुधार सुझाएगी. तब तक ई-टोकन सिस्टम स्थगित रहेगा.
27 जुलाई: नर्मदापुरम से निकली किसान क्रांति पदयात्रा
करीब दो हजार किसान नर्मदापुरम से भोपाल के लिए पैदल मार्च पर निकले थे. ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में राशन, बिस्तर और खाना बनाने का सामान साथ था. पुलिस ने रास्ते में कई जगह बैरिकेड लगाए, लेकिन किसानों ने धरना दिया और आगे बढ़ते रहे.
28 जुलाई: भोपाल की सीमा तक पहुंच गए किसान
अगले दिन किसान मंडीदीप और ओबेदुल्लागंज होते हुए भोपाल की सीमा तक पहुंच गए. कई जगह बैरिकेड हटाए गए. प्रशासन ने उन्हें शहर के भीतर जाने से रोका तो किसानों ने वीर सावरकर सेतु के पास डेरा डाल दिया. उन्होंने साफ कहा था कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी, तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे.
29 जुलाई: राजधानी में बढ़ा दबाव
किसानों ने सड़क पर ही दाल-बाटी बनाई, भोजन तैयार किया और प्रदर्शन जारी रखा. मुख्यमंत्री आवास की तरफ मार्च की कोशिश हुई. कई जगह पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई. सरकार ने इसके बाद किसानों के प्रतिनिधियों के साथ लंबी बैठक की.
इस दौरान मूंग खरीद बढ़ाने, खरीद की तारीख बढ़ाने और ई-टोकन व्यवस्था की समीक्षा जैसे प्रस्ताव सामने आए. हालांकि किसानों ने उस समय कहा कि उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं और आंदोलन जारी रहेगा.
30 जुलाई: बातचीत बनी समाधान का रास्ता
लगातार बातचीत के बाद सरकार और किसान संगठनों के बीच सहमति बनी. सरकार ने भरोसा दिया कि पहले से ज्यादा मूंग की खरीद की जाएगी ताकि अधिक किसानों को MSP का लाभ मिल सके.
सबसे अहम फैसला खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का रहा. सरकार ने किसानों की अन्य मांगों पर भी सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया.
सरकार के इन आश्वासनों के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया. इसके साथ ही कई दिनों से भोपाल की सड़कों पर डटे किसान अपना धरना खत्म कर वापस लौटने लगे हैं.
रवीश पाल सिंह