मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जबरदस्त हंगामा हुआ. MSP पर मूंग की फसल की खरीद की मांग कर रहे किसानों ने पुलिस की कई बैरिकेडिंग तोड़ दीं और मुख्यमंत्री मोहन यादव के सरकारी आवास से सिर्फ एक किलोमीटर दूर रोशनपुरा चौराहे तक पहुंच गए. रोशनपुरा पहुंचने से पहले प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास के बाहर प्रदर्शन किया, जबकि मध्य प्रदेश सरकार प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रही थी.
संयुक्त किसान मोर्चा और 18 अन्य किसान संगठनों के नेतृत्व में मार्च करने वालों ने नर्मदापुरम रोड पर बैरिकेडिंग की कई परतें पार कीं, जिससे पुलिस के साथ तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए.
रोशनपुरा चौराहे पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था, जहां प्रदर्शनकारी अंततः डेरा डाले रहे, जबकि राज्य सचिवालय में बातचीत जारी रही. हालांकि किसानों और पुलिस के बीच बार-बार झड़पें हुईं और कुछ बसों की खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गईं, लेकिन अधिकारियों ने बल प्रयोग से परहेज किया. देखें एक VIDEO:-
किसान गर्मियों की पूरी मूंग की फसल की MSP पर खरीद, खाद वितरण के लिए ई-टोकन सिस्टम को खत्म करने और अगली बुवाई के मौसम से पहले खाद की समय पर उपलब्धता की मांग कर रहे हैं.
संवाद से निकलेगा हल, जनता को न हो परेशानी: CM
संकट को कम करने के प्रयास में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसान प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के लिए चार सदस्यीय समिति की घोषणा की.
CM यादव ने कहा, "सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है और सकारात्मक सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है. साथ ही दोनों पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता को असुविधा न हो. हम बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाएंगे."
उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय किसान संगठन और अन्य संगठन बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझा लेंगे, और कहा कि जन कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता में किसानों का कल्याण भी शामिल है.
सरकार के संपर्क करने के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारियों ने नर्मदापुरम रोड पर अर्धनग्न प्रदर्शन करके आंदोलन को और तेज कर दिया. इस विरोध प्रदर्शन को स्थानीय निवासियों का भी समर्थन मिला, जिसमें 'जेनरेशन Z' के कई सदस्य भी शामिल थे.
सड़क पर बना बाटी-चोखा, किया 'सद्बुद्धि यज्ञ'
आंदोलन को धार देने के लिए किसानों ने विरोध के अनोखे तरीके अपनाए. नर्मदापुरम रोड पर अर्धनग्न होकर सरकार विरोधी नारेबाजी की गई. प्रदर्शनकारियों ने 'सद्बुद्धि यज्ञ' किया और सड़क के किनारे बाटी-चोखा पकाया.
मंगलवार रात राज्य के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना और किसान नेताओं के बीच बातचीत का पहला दौर बिना किसी नतीजे के खत्म होने के बाद भी आंदोलन के कम होने के कोई संकेत नहीं दिखे.
किसान रात भर सड़क पर डटे रहे, जिससे भारी ट्रैफिक जाम हुआ और पुलिस को यात्रियों का रास्ता बदलना पड़ा. मंगलवार रात मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को वीर सावरकर सेतु के पास रोक दिया गया, जबकि बुधवार सुबह आसपास के इलाकों में स्कूल बंद रहे.
शिवराज के घर प्रदर्शन के बाद केंद्र-राज्य में पत्राचार तेज
इस बीच, कंषाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर किसानों को बेहतर रिटर्न दिलाने के लिए गर्मी की मूंग की खरीद सीमा बढ़ाने की मांग की.
अपने आवास के बाहर प्रदर्शनकारियों के जमा होने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए, शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा कि केंद्र ने पहले ही 2025-26 सीजन के लिए 'प्राइस सपोर्ट स्कीम' के तहत मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 टन तक गर्मी की मूंग की खरीद को मंजूरी दे दी है.
उन्होंने बताया कि यह PM-AASHA योजना के तहत देश भर में खरीद के लिए मंज़ूर किए गए कुल 5 लाख 23 हजार 243 टन का 87 प्रतिशत है, जो किसी भी राज्य को दिया गया सबसे ज्यादा आवंटन है. एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चौहान के एक करीबी सहयोगी ने यह पत्र मीडिया के साथ शेयर किया.
CM चौहान ने यह भी साफ किया कि केंद्र राज्यों के लिए खरीद का लक्ष्य तय नहीं करता है. उन्होंने कहा कि PM-AASHA दिशानिर्देशों के तहत, अनुमानित उत्पादन के 25 प्रतिशत तक खरीद की अनुमति है, और उस सीमा से अधिक की कोई भी खरीद राज्य सरकार को करनी होगी.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 29 जुलाई तक केंद्र के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश ने अब तक लगभग 60,000 टन गर्मी की मूंग की खरीद की है. उन्होंने राज्य सरकार से किसानों के व्यापक हित में खरीद में तेजी लाने का आग्रह किया. अत: राज्य सरकार को अपने स्वीकृत कोटे की पूरी मूंग तेजी से खरीदकर किसानों को राहत देनी चाहिए.
aajtak.in