'नौकरी में कन्नड़ लोगों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं', IT कंपनियों को CM डीके शिवकुमार की चेतावनी

बेंगलुरु की IT कंपनियों में स्थानीय युवाओं को नौकरी मिलने को लेकर उठी शिकायतों पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने निजी कंपनियों को चेतावनी दी है कि भर्ती में जानबूझकर भेदभाव करने की बात सामने आई, तो कार्रवाई की जाएगी.

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नौकरी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शिवकुमार की चेतावनी. (Photo: PTI) नौकरी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शिवकुमार की चेतावनी. (Photo: PTI)

नागार्जुन

  • बेंगलुरु ,
  • 25 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:09 PM IST

कर्नाटक में स्थानीय युवाओं को नौकरी नहीं मिलने की शिकायतों ने अब सरकार का ध्यान खींचा है. बेंगलुरु की IT कंपनियों में कन्नड़ लोगों को भर्ती में नजरअंदाज करने के आरोपों पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई कंपनी जानबूझकर स्थानीय लोगों को नौकरी देने से बचती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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डीके शिवकुमार ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुद्दे पर अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि 'बेंगलुरु की IT कंपनियों में स्थानीय कन्नड़ भाषी लोगों को नौकरी नहीं मिलने की शिकायतों को सरकार ने गंभीरता से लिया है. कर्नाटक में स्थानीय लोगों के सम्मान, अधिकार और रोजगार के अवसरों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी'.

बेंगलुरु को देश की टेक्नोलॉजी राजधानी बताते हुए सीएम ने कहा कि राज्य को अपने लोगों की प्रतिभा, हुनर और काम करने की क्षमता पर गर्व है. अगर किसी निजी कंपनी की भर्ती प्रक्रिया में जानबूझकर कन्नड़ लोगों को पीछे रखने की बात सामने आती है, तो उचित कदम उठाए जाएंगे.

रिज्यूमे में कन्नड़ लिखने वालों को नौकरी नहीं देने का आरोप

यह मुद्दा सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो के बाद चर्चा में आया है. इनमें कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि बेंगलुरु की कंपनियों में स्थानीय कन्नड़ युवाओं को नौकरी के पर्याप्त मौके नहीं मिल रहे हैं. हाल ही में सामने आए एक वीडियो में एक महिला ने दावा किया कि कुछ कंपनियां उन उम्मीदवारों को नौकरी देने से बच रही हैं, जिनके रिज्यूमे में कन्नड़ भाषा का जिक्र होता है. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों में होने वाले कैंपस इंटरव्यू के दौरान कंपनियां बहुत कम कन्नड़ उम्मीदवारों को चुनती हैं. उसका कहना था कि इस वजह से स्थानीय युवाओं को नौकरी पाने में परेशानी हो रही है. महिला ने वीडियो के जरिए डीके शिवकुमार से इस मामले में दखल देने की अपील की थी.

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सरकार ने शिकायतों को लिया बेहद गंभीरता से

इन तमाम शिकायतों और वायरल हो रहे वीडियो को सरकार ने बहुत गंभीरता से लिया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए साफ किया गया कि कर्नाटक में रहने वाले स्थानीय लोग ही सर्वोपरि हैं. सरकार किसी भी कीमत पर यहां के युवाओं के अधिकारों और उनकी गरिमा की अनदेखी नहीं होने देगी. लेकिन अगर कोई भी प्राइवेट संस्थान स्थानीय युवाओं को दरकिनार करने की साजिश करता पाया गया, तो उस पर नियमों के मुताबिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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