उत्तराखंड के हल्द्वानी में एक राजनीतिक रैली के बाद का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद रामलीला मैदान में बने उस मंच के कथित 'शुद्धीकरण' का मामला तूल पकड़ चुका है. इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा विरोध जताया है. उन्होंने इसे सामाजिक भेदभाव का सबसे घटिया रूप बताया है.
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस घटना की कड़ी निंदा की है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा, भाजपा के राज में सामाजिक भेदभाव का यह निकृष्टतम रूप है. उन्होंने लिखा कि हल्द्वानी में जिस मंच से खड़गे जी ने भाषण दिया, उसका कुछ लोगों ने सिर्फ इसलिए शुद्धीकरण किया क्योंकि वे दलित समाज से आते हैं.
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपाइयों और उनके साथियों को मंच धोने के बजाय अपने गंदे और कलुषित मन को गंगाजल से साफ करना चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि समाज में समानता न चाहने वाले और भाईचारे की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लोग आज कहां छिपे हैं?
अखिलेश यादव ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अब इस तरह के हर सामाजिक दुर्व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न का जवाब 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज एकजुट होकर देगा. उन्होंने साफ किया कि अब पीडीए समाज अपना अपमान चुपचाप सहन करने के मूड में बिल्कुल नहीं है.
मल्लिकार्जुन खड़गे बोले-मेरा अपमान हुआ
संसद में इस मामले पर जमकर हंगामा हुआ. राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान खड़गे ने कहा कि मैं अपने एससी होने को मुद्दा नहीं बनाता, शुद्धीकरण करके मेरा अपमान किया गया.
खड़गे ने कहा, 'बड़े दुख के साथ कहना पड़ता है मैं हल्द्वानी में पब्लिक स्पीच में रामलीला मैदान में भाषण दिया. लाखों लोग वहां पर थे. उस वक्त मैंने किसी समाज का किसी धर्म का नाम नहीं लिया सिर्फ मैं लोगों के समस्याओं को वहां पर बताया, लेकिन मेरे स्पीच होने के बाद कल उन लोगों ने हवन करके उस स्टेज का शुद्धीकरण का काम किया.'
क्या था मामला
दरअसल हल्द्वानी में आयोजित हुई खड़गे की रैली के बाद श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से रामलीला मैदान में शुद्धीकरण यज्ञ कराया गया था. संगठन के सदस्यों ने खड़गे को सनातन और हिंदू संगठनों का विरोधी बताते हुए कहा कि जिस मैदान में रामलीला का मंचन होता है, वहां ऐसे व्यक्ति के आने के बाद मैदान का शुद्धीकरण किया जाना जरूरी था. संगठन ने खड़गे के पिछले कथित सनातन विरोधी बयानों को इसका आधार बताया.
लेकिन यज्ञ की अग्नि के साथ ही सियासत भी भड़क उठी. कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे ने इस पूरे घटनाक्रम को दलित विरोधी मानसिकता बताते हुए बीजेपी पर निशाना साधा. कांग्रेस का आरोप है कि शुद्धीकरण यज्ञ बीजेपी से जुड़े लोगों ने कराया. पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस की रैली के बाद ही रामलीला मैदान के ‘शुद्धीकरण’ की जरूरत क्यों पड़ी?
'खड़गे के पुराने बयानों के चलते विरोध'
वहीं, श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय का अपमान करना नहीं था. संगठन का दावा है कि खड़गे के पिछले बयानों को सनातन विरोधी मानते हुए ही यह यज्ञ किया गया. संगठन के मुताबिक, रामलीला जैसे धार्मिक आयोजन से जुड़े मैदान में सनातन विरोधी विचार रखने वाले व्यक्ति की रैली के बाद शुद्धीकरण करना उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है.
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