पैर दबाने में हुई थी देर तो पत्नी को जिंदा जलाया, 11 साल बाद हैवान पति को उम्रकैद

ठाणे में पैर दबाने में हुई देरी पर पत्नी को केरोसिन डालकर जलाने के मामले में 11 साल बाद कोर्ट ने पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने पत्नी के दूसरे मृत्यु पूर्व बयान को भरोसेमंद माना.

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पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को 11 साल बाद उम्रकैद. (representational photo) पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को 11 साल बाद उम्रकैद. (representational photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:10 PM IST

महाराष्ट्र के ठाणे में पत्नी को पैर दबाने में हुई देरी पर जिंदा जलाने के मामले में 11 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया है. महज पैर दबाने में थोड़ी देर होने पर अपनी पत्नी को जिंदा जलाने वाले 38 साल के सुभाष वाघमारे को सेशन कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने पीड़िता के दूसरे मृत्यु पूर्व बयान को पूरी तरह सच मानते हुए मुजरिम पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया.

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यह दर्दनाक वारदात 9 मई 2015 की है. ठाणे के पास घोडबंदर गांव में सुभाष अपनी पत्नी वैशाली के साथ किराए के मकान में रहता था. उस रात सुभाष ने वैशाली से पैर दबाने के लिए कहा.

वैशाली ने जवाब दिया कि वह पहले बर्तन साफ कर लेगी, फिर पैर दबाएगी. इतनी सी बात पर सुभाष आपा खो बैठा. उसने वैशाली को कई थप्पड़ जड़ दिए. पिटाई के बाद दर्द से कराहती वैशाली कमरे में बिस्तर पर जाकर बैठ गई.

बिस्तर पर दर्द से कराह रही थी पत्नी, उड़ेल दिया मिट्टी का तेल

गुस्से में अंधे हो चुके सुभाष की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी. उसने घर में रखा मिट्टी का तेल वैशाली पर उड़ेल दिया और माचिस जलाकर आग लगा दी.

गंभीर रूप से झुलसी वैशाली को तुरंत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया. चार दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 13 मई 2015 को उसने दम तोड़ दिया. मामले को साबित करने के लिए सरकारी पक्ष ने अदालत में 10 गवाह पेश किए.

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अदालत ने दूसरे बयान को माना सच

इस पूरे मुकदमे में वैशाली के दो अलग-अलग बयान सबसे अहम रहे. 10 मई को दर्ज पहले बयान में उसने कहा था कि पेट और कान के असहनीय दर्द के चलते उसने खुदकुशी की कोशिश की. बचाव पक्ष ने इसी को ढाल बनाकर खुदकुशी की दलील दी.

अगले ही दिन 11 मई को स्पेशल एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और पुलिस के सामने वैशाली ने दूसरा बयान दर्ज कराया. उसने साफ किया कि अस्पताल में पति के मौजूद होने की वजह से वह डर गई थी और सच नहीं बोल पाई थी. दूसरे बयान में उसने पति की पूरी करतूत सामने रख दी. जज आर. डी. सावंत ने माना कि दूसरा बयान पूरी तरह भरोसेमंद है. अदालत ने खुदकुशी की थ्योरी खारिज करते हुए सुभाष को हत्या का दोषी करार दिया.

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ठाणे में ही साड़ी न लाने पर कुकर के ढक्कन से पति की हत्या

घरेलू झगड़े में जान लेने का यह इकलौता मामला नहीं है. ठाणे के बदलापुर ईस्ट में एक महिला ने साड़ी न लाने पर अपने 35 साल के पति हरराम किशुनजी सिंह की जान ले ली थी.

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विवाद बढ़ने पर 30 साल की सुनीतादेवी ने प्रेशर कुकर के ढक्कन से पति पर वार किया, फिर गला घोंटकर मार डाला. शुरुआत में इसे हादसा बताने की कोशिश हुई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया.

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