महाराष्ट्र के नांदेड़ से शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर गुरुवार को हमले की जानकारी मिली थी. घटना के तुरंत बाद उन्हें उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया.
अब नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर हमले के सिलसिले में मुदखेड़ पुलिस स्टेशन में आरोपी जसपाल सिंह के खिलाफ धारा 307 (जान से मारने की कोशिश), 353 (सरकारी काम में बाधा डालना) IPC और 4/25 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. शुक्रवार को आरोपी जसपाल सिंह को कोर्ट में पेश किया जाएगा.
इस बीच, अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि नांदेड़ के गुरुद्वारा साहिब में सुखबीर सिंह बादल पर हुआ हमला बेहद चिंताजनक घटना है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. उन्होंने मांग की कि नांदेड़ हमले की विस्तृत जांच NIA को सौंपी जाए.
दरबार साहिब में दिसंबर 2024 में सरदार सुखबीर बादल पर हुए हमले और नांदेड़ हमले की एक साथ जांच होनी चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इनके पीछे कोई साझा साजिश, नेटवर्क या मकसद है.
बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि दोनों घटनाएं खुफिया और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. सुरक्षा इंतजामों के बावजूद एक हमलावर Z-प्लस सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के इतने करीब कैसे पहुंच गया.
नारायण सिंह चौरा, जिसने दिसंबर 2024 में दरबार साहिब में सुखबीर बादल पर हमला किया था, उसका कथित तौर पर मिलिटेंट बैकग्राउंड था और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन ISI से संबंध थे. उसके पूरे नेटवर्क और संपर्कों की जांच होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि दरबार साहिब में सुखबीर बादल की हत्या की कोशिश के बाद नारायण सिंह चौरा को जमानत कैसे मिली और वह कुछ ही महीनों में जेल से बाहर कैसे आ गया.
(Input: Kuwarchand Mandle)
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