महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे जालना जिले से मुंबई के लिए रवाना हो गए, जबकि मुंबई पुलिस ने उन्हें आजाद मैदान में प्रदर्शन की इजाजत देने से इनकार कर दिया था. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि गणेशोत्सव के दौरान किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए और आंदोलन के समय पर सवाल उठाए. जरांगे पिछले 17 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और मुंबई पहुंचने से पहले करीब 400 किलोमीटर का सफर तय करेंगे. उनके काफिले में गांव गांव से लोग जुड़ रहे हैं और सरकार ने पूरे रास्ते कड़ी सुरक्षा तैनात कर दी है.
जरांगे ने पहले की योजना बदलकर मुंबई जाने के लिए सिर्फ पांच से दस साथियों को साथ लिया. उनका काफिला बीड के पातोड़ा, अहिल्यानगर के श्रीगोंडा, पुणे के हडपसर और रायगढ़ के खोपोली से होते हुए 19 सितंबर को मुंबई पहुंचेगा.
जरांगे ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट पहले ही कह चुका है कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने वाले किसी को रोका नहीं जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मारने की साजिश रची जा रही है और सीधे फडणवीस पर निशाना साधा. सुरक्षा के लिए पुलिस ने 648 जवान तैनात किए हैं जिनमें अधिकारी, होमगार्ड और रैपिड सिटी पुलिस की टुकड़ियां शामिल हैं.
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फडणवीस ने कहा कि सरकार ने जरांगे की 13 में से 12 मांगें मान ली हैं और बाकी बची एक मांग पर कानूनी अड़चनें भी उन्हें समझाई गई हैं. जरांगे की पत्नी सुमित्रा ने कहा कि सरकार ने समय पर फैसला नहीं लिया इसलिए उनके पति को मुंबई जाना पड़ा, और फडणवीस की पत्नी अमृता का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने पति से जरांगे को आरक्षण दिलाने के लिए कहें.
वहीं AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा कि उनकी पार्टी मराठा समाज की जायज मांगों का समर्थन करती रही है लेकिन साथ ही धनगर समाज और पिछड़े मुसलमानों, खासकर पसमांदा समुदाय को भी आरक्षण मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुसलमानों को शिक्षा में पांच फीसदी आरक्षण की सिफारिश की थी लेकिन भाजपा सरकार ने उसे लागू नहीं किया. गौरतलब है कि जरांगे ने अगस्त 2025 में भी आजाद मैदान पर बड़ा आंदोलन किया था, जो 2 सितंबर 2025 को सरकार द्वारा आठ में से छह मांगें मानने के बाद खत्म हुआ था.
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