महाराष्ट्र के जलगांव रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF की सतर्कता से एक फर्जी महिला पुलिसकर्मी का खुलासा हुआ है. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सुरक्षा जांच के दौरान वर्दी पहने एक युवती संदिग्ध हालत में घूमती मिली. RPF जवानों ने उससे पूछताछ की तो उसने खुद को नासिक RPF में तैनात बताया.
युवती के दावे पर शक होने के बाद जवानों ने उससे पहचान पत्र मांगा, लेकिन वह कोई वैध ID कार्ड नहीं दिखा सकी. इसके बाद RPF ने नासिक में संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया. वहां से जानकारी मिलने के बाद साफ हो गया कि युवती विभाग में तैनात नहीं है और उसने झूठ बोलकर खुद को RPF कर्मचारी बताया था.
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जांच में युवती की पहचान जामनेर तालुका के कापूसवाड़ी निवासी के तौर पर हुई. पूछताछ में उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह शादी के लिए संभावित लोगों पर अपना प्रभाव जमाना चाहती थी. इसी वजह से उसने RPF की वर्दी पहनकर खुद को पुलिसकर्मी के तौर पर पेश किया.
पहले भी पुलिस की वर्दी में खिंचवा चुकी तस्वीरें
पुलिस के मुताबिक, युवती इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस की वर्दी पहनकर तस्वीरें भी खिंचवा चुकी है. उसके पास से कुछ संदिग्ध और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं. मामले को गंभीरता से लेते हुए जलगांव जीआरपी यानी लोहमार्ग पुलिस थाने में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है.
RPF की शुरुआती जांच में सामने आया कि युवती के पास विभाग में नौकरी से संबंधित कोई वैध पहचान पत्र नहीं था. इसके बावजूद वह रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा बल की वर्दी में घूम रही थी. सतर्क जवानों की पूछताछ के चलते उसके दावे की तुरंत जांच हो सकी और फर्जी पहचान का पर्दाफाश हो गया.
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसने फर्जी दस्तावेज कहां से हासिल किए और RPF की वर्दी उसके पास कैसे आई. जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि पुलिस की वर्दी पहनने के पीछे केवल शादी के लिए रौब जमाने की वजह थी या इसके अलावा कोई दूसरा आपराधिक उद्देश्य भी था.
शादी के लिए फर्जी पहचान बनाने का दावा
पूछताछ में युवती ने कथित तौर पर बताया कि वह विवाह के लिए लोगों पर प्रभाव डालना चाहती थी. इसी उद्देश्य से उसने RPF की वर्दी पहनने का फैसला किया. पुलिस उसके बयान की पुष्टि के लिए उपलब्ध दस्तावेजों, तस्वीरों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है.
जलगांव जीआरपी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अब युवती के संपर्कों और उसकी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है. जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि फर्जी पुलिसकर्मी बनकर वर्दी पहनने और दस्तावेज रखने के पीछे उसकी वास्तविक मंशा क्या थी.
मनीष शांताराम जोग