महाराष्ट्र FDA ने शिशु आहार से जुड़े उत्पादों को लेकर एक कंप्लायंस ऑर्डर जारी किया है. यह आदेश दो साल तक के बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले इन्फेंट फॉर्मूला, इन्फेंट मिल्क फूड, फॉलो अप फॉर्मूला, कॉम्प्लिमेंटरी फूड, स्पेशल मेडिकल पर्पज फूड और फीडिंग बॉटल्स पर लागू होता है.
इन उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग, विज्ञापन, प्रमोशन और बिक्री के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा. आदेश का दायरा सिर्फ कंपनियों तक नहीं है. यह पूरी सप्लाई चेन पर लागू होगा. यानी निर्माता के साथ ब्रांड ओनर, इम्पोर्टर, पैकर, डिस्ट्रीब्यूटर, मेडिकल स्टोर, अस्पताल और ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी जांच के दायरे में आ सकते हैं.
आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी फॉर्मूला या शिशु आहार को मां के दूध के बराबर या उससे बेहतर बताकर प्रचारित नहीं किया जा सकता. पैकेट पर “Mother’s milk is best for your baby” जैसी सूचना और दूसरी चेतावनियां प्रमुखता से देनी होंगी. फ्री सैंपल, गिफ्ट, कूपन, कैशबैक और दूसरे प्रलोभन पर रोक है. टीवी, प्रिंट, वेबसाइट, ई कॉमर्स, सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और इन्फ्लुएंसर्स के जरिए भी प्रतिबंधित प्रचार नहीं हो सकता.
डॉक्टरों, हेल्थ वर्कर्स, अस्पतालों और मेडिकल संगठनों को उपहार, आर्थिक फायदा, स्पॉन्सरशिप, हॉस्पिटैलिटी या स्पीकर फीस देकर प्रचार कराना मना है. कॉन्फ्रेंस, CME, CPD, सेमिनार, वर्कशॉप या रिसर्च के नाम पर भी ऐसा नहीं चलेगा.
पैकेट पर उम्र, इस्तेमाल का तरीका, सामग्री, पोषण की जानकारी और चेतावनियां साफ लिखनी होंगी. “कम्प्लीट”, “हेल्थ फूड”, “एनर्जी फूड” या “ह्यूमनाइज्ड” जैसे शब्दों से भ्रम पैदा करना नियमों के दायरे में आता है. शिशु या महिला की तस्वीरों के इस्तेमाल पर भी कानून में रोक है. कॉम्प्लिमेंटरी फूड छह महीने की उम्र के बाद ही दिया जाना चाहिए. एडेड कलर, फ्लेवर, प्रिजर्वेटिव और दूसरे प्रतिबंधित पदार्थ तय मानकों के खिलाफ इस्तेमाल नहीं हो सकते. सुक्रोज और फ्रुक्टोज की कुल मात्रा कुल कार्बोहाइड्रेट के 20 प्रतिशत तक ही रह सकती है.
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नियम तोड़ने पर FDA जांच, सैंपलिंग, तलाशी और जब्ती कर सकता है. उल्लंघन की प्रकृति के हिसाब से अभियोजन और जुर्माना भी लग सकता है. लाइसेंस पर भी कार्रवाई हो सकती है. यह आदेश खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 और खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम 2020 के तहत लागू किया गया है. इन नियमों में कहा गया है कि इन उत्पादों को IMS Act और उसके 2003 के संशोधन का पालन करना होगा. अस्पतालों और पीडियाट्रिशियनों को संदिग्ध एडवर्स इवेंट्स की जानकारी संबंधित विभाग को देनी होगी. FDA ने अस्पतालों, IAP, IMA और दूसरे संगठनों के साथ बैठकों की बात कही है.
महाराष्ट्र में छह महीने तक के बच्चों में एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग का आंकड़ा करीब 55.8 प्रतिशत है. शहरों में यह करीब 52.8 प्रतिशत और गांवों में करीब 75.2 प्रतिशत है. करीब 96 प्रतिशत प्रसव संस्थाओं में होते हैं, फिर भी जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराने के लिए अस्पतालों में बेहतर काउंसलिंग की जरूरत बताई गई है. छह महीने के बाद स्तनपान के साथ उचित पूरक पोषण की सलाह दी जाती है. शिशु आहार बेचना प्रतिबंधित नहीं है, पर उसकी मार्केटिंग पर कड़े नियम हैं.
दूसरी खबर FDA के अधिकारियों पर लगे आरोपों की है. शिवसेना UBT सांसद संजय राउत ने कमिश्नर तुकाराम मुंढे को पत्र लिखकर कहा कि होटल, रेस्टोरेंट और क्विक कॉमर्स कारोबारियों को लाइसेंस सस्पेंड करने की धमकी देकर पैसे मांगे जा रहे हैं. उनके मुताबिक क्लोजिंग नोटिस वापस कराने के नाम पर कथित वसूली की रकम पहले 10 से 12 हजार रुपये थी और अब 75 हजार से 2 लाख रुपये तक पहुंच गई है.
उन्होंने स्वतंत्र जांच की मांग की है. मुंढे ने कहा कि सिर्फ आरोप पर कार्रवाई नहीं हो सकती, ठोस सबूत चाहिए. शिकायतकर्ता को बताना होगा कि किस अधिकारी ने, किससे और किस काम के लिए पैसे मांगे. सबूत या बयान उन्हें, ACB, विभाग के सचिव या किसी सक्षम एजेंसी को दिया जा सकता है. उन्होंने ACB के डीजी से भी बात की है और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात दोहराई. उन्होंने साफ कहा कि सबूत मिलने पर वे कार्रवाई जरूर करेंगे.
सस्पेंशन के बारे में मुंढे ने कहा कि अपील का प्रावधान है और अदालत का रास्ता भी खुला है. 6 अगस्त तक करीब 600 सस्पेंशन हुए, जिनमें से 100 से 125 अपील उनके पास आईं और उन पर फैसले हुए. जिन्होंने अपील नहीं की, उन्होंने सस्पेंशन स्वीकार किया होगा और जरूरी कंप्लायंस के बाद बहाली हो सकती है. कंप्लायंस के बाद भी सस्पेंशन रद्द न हो तो अपील या शिकायत की जा सकती है. मुंढे के मुताबिक FDA के शिकायत पोर्टल पर शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था है और संबंधित अधिकारियों को नाम व मोबाइल नंबर पता नहीं चलता. इसका मकसद शिकायतकर्ता को दबाव या ब्लैकमेल से बचाना है.
सरोगेट विज्ञापन मामले में तीनों अभिनेताओं ने दिया FDA के नोटिस का जवाब
महाराष्ट्र FDA के सरोगेट विज्ञापन मामले में नया अपडेट सामने आया है. FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के मुताबिक, अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने विभाग की ओर से जारी नोटिस का जवाब दे दिया है. मामले में तीनों अभिनेताओं को एक विज्ञापन को लेकर नोटिस जारी किया गया था, जिस पर कथित तौर पर प्रतिबंधित तंबाकू/निकोटीन उत्पाद के अप्रत्यक्ष प्रचार का सवाल उठाया गया था.
मुंढे के मुताबिक, तीनों में से दो अभिनेताओं ने सुनवाई की मांग की थी और दोनों की सुनवाई पूरी हो गई है. हालांकि, कमिश्नर ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि तीनों में से किन दो अभिनेताओं ने सुनवाई में हिस्सा लिया.
विद्या