धाराशिव: बारिश और पानी छोड़े जाने से 2.26 लाख हेक्टेयर फसलें तबाह, 1.98 लाख किसान प्रभावित

महाराष्ट्र के धाराशिव में भारी बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण आई बाढ़ ने भारी नुकसान किया है. जिले के 363 गांवों में करीब 2.26 लाख हेक्टेयर फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे लगभग 1.98 लाख किसानों की फसलें तबाह हो गईं. इसके अलावा, 1,048 घर प्रभावित हुए और दो लोगों समेत 165 मवेशियों की जान भी चली गई.

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बाढ़ से तबाह हो गईं फसलें. (Photo: Representational) बाढ़ से तबाह हो गईं फसलें. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • धाराशिव,
  • 26 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 2:37 PM IST

मराठवाड़ा क्षेत्र के धाराशिव जिले में भारी बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण हाल ही में आई बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है. अधिकारियों के अनुसार, जिले के 363 गांवों में करीब 2.26 लाख हेक्टेयर फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे लगभग 1.98 लाख किसानों की फसलें नष्ट हो गईं.

एजेंसी के अनुसार, जिला प्रशासन ने बताया कि बाढ़ से केवल फसलों का नुकसान नहीं हुआ, बल्कि 1,048 घर भी प्रभावित हुए हैं. बाढ़ के कारण दो लोगों की जान चली गई और 165 मवेशियों की भी मौत हुई. सबसे ज्यादा नुकसान, भुम, परंडा और कुछ अन्य तालुकों में हुआ है.

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तालुका-वार नुकसान की स्थिति के अनुसार, भुम इलाके में 58,100 हेक्टेयर, उमरगा में 54,206 हेक्टेयर, धाराशिव में 44,060 हेक्टेयर, तुलजापुर में 39,850 हेक्टेयर, लोहरा में 7,690 हेक्टेयर और कालंब में 5,150 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है. भुम तालुका में सबसे अधिक नुकसान हुआ है, कालंब और लोहरा में भी हुआ है.

यह भी पढ़ें: मराठवाड़ा में आफत का मानसून: हजारों घर डूबे, फसलें चौपट और 31 लाख किसानों की उम्मीदें दांव पर

जिला प्रशासन वर्तमान में फसल नुकसान का सर्वेक्षण कर रहा है. राज्य सरकार को मुआवजे की मांग भेजी जाएगी. अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे नुकसान की सही जानकारी दें, ताकि उचित राहत और मुआवजा सुनिश्चित किया जा सके.

स्थानीय किसानों का कहना है कि अचानक आई बाढ़ और बांधों से पानी छोड़े जाने की वजह से फसलों की पूरी मेहनत बर्बाद हो गई. उन्होंने सरकार से तेजी से मुआवजे और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है. लोगों ने कहा कि मराठवाड़ा क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा और जल प्रबंधन की चुनौतियों के कारण किसानों की जिंदगी संकट में पड़ सकती है. प्रशासन और राज्य सरकार को तत्काल कदम उठाकर प्रभावित किसानों और उनके परिवारों को राहत देनी चाहिए.

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