बेटी हुई है! 4 पीढ़ियों के बाद पैदा हुई पुत्री, परिवार ने रथ में शोभायात्रा निकालकर किया स्वागत

महाराष्ट्र के बीड जिले के परली में दहीफले परिवार में चार पीढ़ियों और करीब 200 साल बाद बेटी का जन्म हुआ है. पांचवीं पीढ़ी में पोती के आने की खुशी में परिवार ने अस्पताल से घर तक मां और नवजात गार्गी का ढोल-नगाड़ों के साथ रथ में भव्य स्वागत किया. इस मौके पर दादा-दादी खुशी से भावुक नजर आए.

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4 पीढ़ियों में पैदा हुई बेटी के स्वागत में निकाली गई शोभयात्रा. (Photo: Screengrabs) 4 पीढ़ियों में पैदा हुई बेटी के स्वागत में निकाली गई शोभयात्रा. (Photo: Screengrabs)

रोहिदास हातागले

  • बीड ,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:20 PM IST

कुछ खुशियां ऐसी होती हैं, जिनका इंतजार सिर्फ कुछ साल नहीं, बल्कि पीढ़ियां करती हैं. महाराष्ट्र के बीड जिले के परली में दहीफले परिवार के लिए बेटी का जन्म ऐसी ही खुशी लेकर आया. करीब 200 साल यानी चार पीढ़ियों के लंबे इंतजार के बाद परिवार में एक बेटी ने जन्म लिया. पांचवीं पीढ़ी में जब नन्ही पोती ने घर में कदम रखा तो दादा-दादी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अस्पताल से छुट्टी मिलते ही बच्ची और उसकी मां को फूलों से सजे रथ में बैठाकर ढोल-नगाड़ों और नाच-गाने के साथ पूरे शहर में शोभायात्रा निकाली गई.

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दहीफले परिवार के मुताबिक चार पीढ़ियों से उनके घर में किसी बेटी की किलकारी नहीं गूंजी थी. बेटियां परिवार में क्यों नहीं आ रही थीं, इसकी कसक कहीं न कहीं हर पीढ़ी के मन में थी. लेकिन अब नन्ही 'गार्गी' के जन्म के साथ यह इंतजार आखिरकार खत्म हो गया.

मां और बेटी को रथ पर बैठाकर अस्पताल से गांजे-बांजे के साथ ले गया परिवार
पोती को रथ में बैठाकर घर ले जाते वक्त दादा लिंबाजी दहीफले की आंखों में खुशी साफ दिखाई दे रही थी. उन्होंने कहा कि घर में बेटी का होना सौभाग्य की बात है. इतने वर्षों से जिस खुशी का इंतजार था, वह आज उनकी पोती के रूप में उनके घर आई है. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी दोनों बहुओं को भी बेटियों की तरह ही प्यार और सम्मान दिया है.

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दादी सुरेखा दहीफले भी पोती के जन्म से इतनी खुश हुईं कि अस्पताल में ही तय कर लिया था कि बच्ची का घर में साधारण तरीके से नहीं, बल्कि गाजे-बाजे के साथ स्वागत किया जाएगा. परिवार ने अपनी नन्ही बेटी का नाम 'गार्गी' रखा है.

बेटी पैदा होने पर पिता की खुशी का भी नहीं रहा ठिकाना
बेटी के पिता के लिए भी यह पल जिंदगी के सबसे खूबसूरत पलों में से एक है. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर बेटे की चाहत रखते हैं, लेकिन बेटी के जन्म की खुशी और उसका एहसास ही अलग होता है. उन्होंने अपनी बेटी को फूल की तरह पालने और उसे खूब प्यार-दुलार देने की बात कही.

खास बात यह है कि दादाजी खुद एक स्कूल के प्रिंसिपल हैं. उन्होंने पोती के जन्म को सिर्फ पारिवारिक खुशी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश बनाने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म का जश्न मनाकर वह 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' का संदेश देना चाहते हैं.

करीब 200 साल बाद परिवार में पैदा हुई बेटी
सामाजिक कार्यकर्ता अनंत इंगले ने भी परिवार की इस पहल की सराहना की. उन्होंने कहा कि आज भी कई जगहों पर बेटियों के जन्म को लेकर सोच पूरी तरह नहीं बदली है. ऐसे में दहीफले परिवार ने अपनी बेटी का जिस तरह स्वागत किया, वह समाज के लिए एक खूबसूरत और प्रेरणादायक मिसाल है.

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करीब 200 साल बाद आई इस नन्ही मेहमान ने सिर्फ दहीफले परिवार की चार पीढ़ियों का इंतजार खत्म नहीं किया, बल्कि पूरे परिवार को एक ऐसी खुशी दे दी, जिसे वे शायद जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे. ढोल-नगाड़ों के बीच रथ पर सवार 'गार्गी' का यह स्वागत इस बात की गवाही दे गया कि बेटी जब घर आती है तो सिर्फ एक बच्ची नहीं आती, अपने साथ ढेर सारी खुशियां भी लेकर आती है.

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