'NEET-UG में 410 नंबर होने चाहिए, 340 कैसे?', दावे पर HC का NTA को नोटिस

बॉम्बे हाईकोर्ट ने NEET-UG परीक्षा में अंकों में अंतर को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को नोटिस जारी किया है. याचिकाकर्ता का दावा है कि उसके 410 अंक बनते हैं, लेकिन स्कोरकार्ड में 340 दर्ज हैं.

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इस याचिका पर 6 अगस्त को सुनवाई होगी. (Photo: Representational) इस याचिका पर 6 अगस्त को सुनवाई होगी. (Photo: Representational)

इसरारउद्दीन चिश्ती / विद्या

  • मुंबई,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:19 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को नोटिस जारी किया है. कोर्ट दादर की रहने वाली 18 साल की स्नेहा गमाने की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्हें मिले मार्क्स सही नहीं हैं और उनके हिसाब से मार्क्स में 70 नंबर का अंतर है.

वकील विवेक आरोटे के जरिए दायर स्नेहा की याचिका में मुख्य रूप से याचिकाकर्ता की NEET-UG 2026 ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (OMR) आंसर शीट के दोबारा मूल्यांकन और सही मार्क्स वाली मार्कशीट जारी करने की मांग की गई है.

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याचिका में कहा गया है कि स्नेहा गमाने ने अपनी डाउनलोड की गई OMR शीट की तुलना टेस्ट बुकलेट कोड 80 की ऑफिशियल आंसर की (Answer Key) से की. उन्हें पता चला कि उनके 113 सही जवाब, 46 गलत जवाब और एक ड्रॉप किया गया सवाल था.

मार्किंग स्कीम के हिसाब से कुल 410 मार्क्स होने चाहिए, लेकिन उनके पब्लिश हुए स्कोरकार्ड में 340 मार्क्स दिख रहे हैं. जस्टिस रियाज छागला और फरहान दुबाश की बेंच ने NTA को नोटिस जारी किया और अब इस याचिका पर 6 अगस्त को फिर से सुनवाई होगी.

री-नीट परीक्षा परिणाम को चुनौती देने वाली चार याचिकाएं खारिज

छत्रपति संभाजीनगर स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने री-नीट परीक्षा परिणाम को चुनौती देने वाली चार याचिकाओं को खारिज कर दिया है. अदालत ने हर याचिकाकर्ता पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA द्वारा घोषित परिणाम गलत हैं और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में त्रुटियां हुई हैं.

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इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एन. बी. सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति ए. डी. शिंदे की खंडपीठ ने की. सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित छात्रों की मूल उत्तर पुस्तिकाएं दिल्ली से सीलबंद लिफाफों में मंगाने का आदेश दिया.

उत्तर पुस्तिकाएं अदालत में पेश की गईं, जिनका न्यायालय ने स्वयं परीक्षण किया. साथ ही छात्रों, उनके अभिभावकों और वकीलों को भी मूल उत्तर पुस्तिकाएं देखने का अवसर दिया गया.

रिकॉर्ड की जांच के बाद अदालत ने पाया कि NTA द्वारा दिए गए अंक और घोषित परिणाम मूल उत्तर पुस्तिकाओं के अनुरूप हैं. परिणामों में किसी प्रकार की त्रुटि या विसंगति नहीं पाई गई.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और NTA की ओर से वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता रोहित सर्वज्ञ ने पक्ष रखा और सभी मूल दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए.

अदालत ने सभी तथ्यों और मूल रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद चारों याचिकाएं खारिज कर दीं. साथ ही, गलत और अपुष्ट जानकारी के आधार पर अदालत का दरवाजा खटखटाने पर प्रत्येक याचिकाकर्ता पर 5 हजार रुपये फाइन भी लगाया है.

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