नेपाल में आई भीषण तबाही के बाद मुंबई से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले 61 लोग लापता हैं. इस दल में शामिल लोगों का उनके परिवार से संपर्क नहीं हो पा रहा है. हर गुजरते घंटे के साथ ये परिवार अपनों की खबर के इंतजार में हैं. इस दल का नेतृत्व डॉक्टर और पर्वतारोही मिलिंद चितले और उनकी पत्नी जाह्नवी कर रहे हैं.
23 अगस्त को मुंबई से रवाना हुआ यह दल 25 अगस्त की शाम तक परिजनों के संपर्क में था, लेकिन 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ के बाद इनसे कोई संपर्क नहीं हो सका. मिलिंद चितले के साले संदीप पाध्ये ने बताया कि 25 अगस्त तक परिवार की जाह्नवी से बात हो रही थी. 26 अगस्त को भेजे गए टेक्सट मैसेज अब तक पढ़े नहीं गए हैं. सबसे बड़ी चिंता यह है कि बाढ़ आने के समय दल चीन की सीमा पार कर चुका था या नहीं, इसकी उन्हें कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है.
यात्रा के कार्यक्रम के मुताबिक दल को 26 अगस्त की सुबह तिमुरे से चीन सीमा की ओर रवाना होना था और शनिवार तक मानसरोवर पहुंचना था. चितले की ट्रैवल कंपनी 'हिल्स एंड ट्रेल्स' का एक अधिकारी हालात का पता लगाने के लिए नेपाल पहुंचा है. इस दल में पीडी हिंदुजा अस्पताल के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आनंद देशपांडे और नानावती मैक्स अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. गायत्री देशपांडे भी शामिल हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों की आखिरी फोन लोकेशन 26 अगस्त सुबह 8.28 बजे सीमा के पास ग्यिरोंग पोर्ट के आसपास दर्ज की गई है.
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अपनों के इंतजार में कई परिवार
मुंबई निवासी सतीश पाटणकर भी इस क्षेत्र में यात्रा कर रहे थे. उनके भाई संजय के मुताबिक, सतीश 23 अगस्त को काठमांडू पहुंचे थे और 25 अगस्त को तिमुरे के लिए रवाना हुए थे. उसी शाम उन्होंने बताया था कि उनका करीब 27 लोगों का दल तिमुरे पहुंच चुका है और अगले दिन सीमा पार करने वाला है.
अब सतीश के परिवार को आशंका है कि बाढ़ के दौरान उनका समूह इमिग्रेशन सेंटर के पास हो सकता था. इसी इलाके में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई और जरूरी ढांचे बहा दिए. वहीं गोरेगांव निवासी राहुल देसाई के 67 वर्षीय ससुर अविनाश मर्चेंट भी चार दोस्तों के साथ लापता हैं. उन्होंने 26 अगस्त सुबह करीब 7 बजे परिवार को बताया था कि वे सीमा की ओर निकल रहे हैं.
करीब 8.30 बजे उनके एक दोस्त की एप्पल वॉच से मिली आखिरी लोकेशन चेकपोस्ट के पुल के पास की थी. परिजन अब अधिकारियों से लगातार जानकारी मांग रहे हैं. उनका कहना है कि संकट की इस घड़ी में एक सिंगल-विंडो सूचना व्यवस्था होनी चाहिए, जहां लापता लोगों, बचाए गए यात्रियों और मृतकों की अलग-अलग सूची उपलब्ध हो. इससे परिवारों को अलग-अलग जगह भटकने के बजाय एक ही स्थान से सही जानकारी मिल सकेगी
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