झारखंड के रांची स्थित राज अस्पताल में इलाज के दौरान लातेहार निवासी राजू कुमार पांडे की मौत के बाद विवाद गहरा गया है. परिजनों ने अस्पताल और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही, भारी-भरकम बिल वसूलने और असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जांच के आदेश दिए थे. 4 जुलाई को सरकारी जांच टीम ने अस्पताल पहुंचकर इलाज से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड की जांच की.
जानकारी के अनुसार, 24 मई को लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद राजू कुमार पांडे को पहले लातेहार सदर अस्पताल ले जाया गया था. वहां से उन्हें रिम्स रेफर किया गया, लेकिन परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद में राज अस्पताल लेकर पहुंचे. करीब एक महीने तक इलाज चलने के बाद उनकी मौत हो गई. इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की.
आरोपों से अस्पताल ने किया इनकार
वहीं, राज अस्पताल ने सभी आरोपों को निराधार बताया है. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज गंभीर पॉलीट्रॉमा, ब्रेन इंजरी और कई फ्रैक्चर के साथ भर्ती हुआ था. इलाज के दौरान बाएं पैर का एम्प्यूटेशन करने की सलाह भी दी गई थी, लेकिन परिजनों ने इसकी अनुमति नहीं दी.
अस्पताल के जीएम अरविंद कुमार ने बताया कि मरीज की हालत पहले दिन से ही बेहद गंभीर थी और इलाज स्थापित चिकित्सा मानकों के अनुरूप किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि इलाज से जुड़े सभी रिकॉर्ड सरकारी जांच टीम को सौंप दिए गए हैं. अब पूरे मामले में जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी.
सत्यजीत कुमार / संजीव कुमार गिरी