झारखंड में छात्रों के प्रोटेस्ट मार्च के बीच एक बड़ी खबर आ रही है. झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन यानी कि JPSC के विवादित चेयरमैन एल खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन्हें CID ने गिरफ्तार किया है. कल ही JPSC के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दिया था. इससे पहले 22 जुलाई 2026 को एल खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने इस्तीफा तब दिया था जब CID ने JPSC परीक्षा धांधली के मामले में छापेमारी की थी. तब एल खियांग्ते ने कहा था कि वे चाहते हैं इस मामले की निष्पक्ष जांच हो इसलिए वे इस्तीफा दे रहे हैं.
झारखंड CID ने सोमवार 3 अगस्त को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते से लगभग सात घंटे तक पूछताछ की थी. यह पूछताछ कमीशन द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में की गई, जबकि साथ ही राज्य भर में 18 जगहों पर छापेमारी भी की गई थी. एक अधिकारी ने बताया कि एल खियांग्ते सुबह करीब 11 बजे CID अधिकारियों के सामने पेश हुए और शाम करीब 6 बजे एजेंसी का ऑफिस छोड़कर चले गए; इस मामले में यह पूछताछ का चौथा दौर था.
एल खियांग्ते जेपीएससी परीक्षाओं में धांधली के मामले में मुख्य किरदार रहे थे. एल खियांग्ते पर पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी चुनने का आरोप है. एल खियांग्ते ने JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करने के लिए ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को चुना था.
प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL द्वारा आयोजित की गई सभी परीक्षाएं रद्द की जाए. एल खियांग्ते झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव भी रह चुके हैं.
रिटायर होने के बाद हेमंत ने बनाया JPSC चेयरमैन
एल खियांग्ते के राज्य के मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद पिछले साल फरवरी में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के चेयरमैन नियुक्त किए गए थे.
28 जुलाई से एल खियांग्ते से चार बार पूछताछ की जा चुकी थी.
यह गिरफ़्तारी JPSC के तीनों सदस्यों के इस्तीफ़े के एक दिन बाद हुई है. JPSC द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर उम्मीदवारों के ज़बरदस्त विरोध के बीच उन्होंने इस्तीफ़ा दिया था.
खियांग्तेकी गिरफ़्तारी के साथ ही इस मामले में CID द्वारा गिरफ़्तार किए गए लोगों की संख्या 20 हो गई है.
एल खियांग्ते पर प्रमुख आरोप
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी (TDPL) को ठेका देना
एल खियांग्ते पर आरोप है कि उन्होंने झारखंड की कई परीक्षाओं के संचालन का ठेका TSR Data Processing Limited (TDPL) नाम की कंपनी कोदिया गया. हैरान करने वाली बात यह है कि इस कंपनी को झारखंड की ही एक दूसरी एजेंसी JSSC द्वारा अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था. आरोप है कि बैकग्राउंड चेक के बिना या जानबूझकर इस एजेंसी का चयन किया गया.
रिश्वत और कमीशन का आरोप
TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने दावा किया है कि खियांग्ते ने एजेंसी को ठेका देने के बदले 2 करोड़ रुपये और सभी भुगतानों पर 20% कमीशन की मांग की थी. हालांकि ये आरोप मात्र है. इस बाबत झारखंड सीआईडी ने अबतक कुछ नहीं कहा है.
14वीं JPSC पीटी से शुरू हुआ विवाद
झारखंड में यह विवाद तब शुरू हुआ जब JPSC ने इस महीने की शुरुआत में 14वीं कंबाइंड सिविल सर्विसेज़ परीक्षा के (प्रीलिम्स) परीक्षा के नतीजे घोषित किए. कमीशन ने 103 वैकेंसी के मुकाबले मुख्य परीक्षा के लिए 2204 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया. इसके तुरंत बाद उम्मीदवारों ने कई सवाल उठाने शुरू कर दिए.
पहली मांग कैटेगरी के हिसाब से कट-ऑफ मार्क्स जारी करने की थी, जिसे कमीशन ने नतीजों के साथ जारी नहीं किया था. दूसरी आपत्ति मेरिट लिस्ट को लेकर थी. कई उम्मीदवारों ने दावा किया कि पब्लिश की गई मेरिट लिस्ट पर कमीशन के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर ही नहीं थे.
सोशल मीडिया पर कई कथित OMR शीट सामने आने लगे. छात्रों ने इसे लेकर तरह तरह के दावे किए. कई ऐसे छात्र सफल थे जिनके नंबर कटऑफ से कम थे.
बाद में बैकलॉग भर्ती परीक्षा में भी ऐसे ही दावे किए गए, जहां एक और उम्मीदवार पर आरोप लगा कि उसने बहुत कम सवालों के जवाब दिए थे, फिर भी वह सफल उम्मीदवारों की सूची में शामिल था.
एल खियांग्ते पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने पहले की परीक्षाओं जैसे FRO में भी अनियमितताओं की शिकायत होने के बावजूद एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की.
सत्यजीत कुमार