झारखंड के 29 वर्षीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप ने देश के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चार गोल्ड मेडल जीते हैं. लेकिन देश का नाम रोशन करने वाले इस खिलाड़ी की जिंदगी आज भी संघर्ष से भरी है. सरकारी नौकरी नहीं मिलने के कारण अमरदीप रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचते हैं और परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए कैब भी चलाते हैं. अब उनकी कहानी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले का संज्ञान लिया है. अमरदीप ने आजतक से फोन पर बातचीत में बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी नौकरी नहीं मिली है. उनका कहना है कि झारखंड की स्पोर्ट्स पॉलिसी के कारण नौकरी का लाभ उन्हें नहीं मिल पाया. नौकरी के साथ कैश अवॉर्ड के लिए भी उन्होंने आवेदन किया था, लेकिन उनके आवेदन अब तक पड़े हुए हैं.
अमरदीप के मुताबिक ऐसा नहीं है कि उन्होंने अपनी परेशानी सरकार तक पहुंचाने की कोशिश नहीं की. वह पहले राज्य के खेल मंत्री रहे हफीजुल हसन से भी मिल चुके हैं. इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ. अमरदीप ने बताया कि वह वर्ष 2016 से प्रोत्साहन राशि के लिए सरकार के दरवाजे खटखटा रहे हैं. अमरदीप ने बताया कि उनके कई साथी खिलाड़ी छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार से हैं और उन्हें वहां सरकारी नौकरियां मिली हैं. उन्होंने बताया कि हरियाणा की तरफ से खेलने वाले और उनके कप्तान रहे एक खिलाड़ी को भी वहां की सरकार ने कई सुविधाएं दी हैं. अमरदीप का कहना है कि दूसरी तरफ झारखंड में नौकरी और कैश अवॉर्ड के लिए दिए गए उनके आवेदन अब तक लंबित हैं.
अमरदीप के परिवार की आर्थिक स्थिति भी सामान्य नहीं है. उनके परिवार में माता-पिता और बड़े भाई हैं. उनके पिता सब्जी बेचते हैं और अमरदीप भी उनके काम में हाथ बंटाते हैं. उनकी मां गृहिणी हैं और करीब 35 किलो सब्जी सिर पर रखकर घर-घर बेचती हैं. वहीं उनके बड़े भाई फास्ट फूड का स्टॉल लगाकर परिवार की जरूरतें पूरी करने में योगदान देते हैं.
चार इंटरनेशनल गोल्ड के बावजूद नौकरी नहीं
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना भी अमरदीप के लिए आसान नहीं रहा. उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें प्रतियोगिताओं में जाने के लिए कर्ज लेना पड़ा. हालांकि झारखंड थ्रोबॉल एसोसिएशन ने उनकी मदद की और उनके खर्च का हिस्सा उठाया. अमरदीप के मुताबिक मलेशिया जाने के लिए उन्हें करीब 65 हजार रुपये का कर्ज लेना पड़ा था. इसमें परिवार के साथ झारखंड थ्रोबॉल एसोसिएशन ने भी मदद की. एसोसिएशन ने इस खर्च का करीब आधा हिस्सा उठाया था.
अमरदीप ने बताया कि वर्ष 2020 से वह सरकारी नौकरी के लिए कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान कोरोना आ गया. इसके बाद वर्ष 2022 से उन्होंने लगातार नौकरी के लिए प्रयास जारी रखा, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली. रोजी-रोटी और खेल दोनों को साथ लेकर चलना उनके लिए काफी मुश्किल है. अमरदीप ने बताया कि कई बार रात में कैब चलानी पड़ती है और सुबह प्रैक्टिस के लिए जाना मुश्किल हो जाता है. इसके बावजूद वह अपने खेल करियर को छोड़ना नहीं चाहते. उनका कहना है कि वह तमाम मुश्किलों के बीच सबकुछ मैनेज कर रहे हैं और अभी उन्होंने हार नहीं मानी है.
अमरदीप का अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड उनकी मेहनत की कहानी बताता है. उन्होंने पहला इंटरनेशनल गोल्ड मेडल वर्ष 2015 में मलेशिया में हुई एशियन जूनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप में जीता था. इसके बाद वर्ष 2017 में काठमांडू में आयोजित इंडो-नेपाल थ्रोबॉल चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता. वर्ष 2019 में बेंगलुरु में हुई साउथ एशियन थ्रोबॉल चैंपियनशिप में भी उन्होंने खिताब अपने नाम किया. वर्ष 2026 में रांची में इसी प्रतियोगिता के दूसरे एडिशन में भी अमरदीप ने गोल्ड जीता. इस तरह उनके नाम अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए चार गोल्ड मेडल हैं.
2016 से सरकार के दरवाजे खटखटा रहे खिलाड़ी
अमरदीप की यह कहानी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया है. मुख्यमंत्री ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट कर खेल विभाग को तत्काल इस मामले को देखने और कार्रवाई करने के लिए कहा है. मुख्यमंत्री के पोस्ट के बाद राज्य के खेल मंत्री सुदिव्य सोनू ने आजतक से फोन पर बातचीत की. उन्होंने कहा कि सरकार यह देख रही है कि मौजूदा पॉलिसी के आधार पर अमरदीप को नौकरी में किस तरह शामिल किया जा सकता है. इसके साथ ही रोजगार के दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है. अमरदीप अब भी खेल को लेकर आगे बढ़ने की तैयारी में हैं. उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2026 के आखिर में वह श्रीलंका जाने वाले हैं, जहां एक टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगे. एक तरफ देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाला यह खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर उतरने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ परिवार की जरूरतों के लिए सब्जी बेचने और कैब चलाने का संघर्ष भी जारी है.
सत्यजीत कुमार