झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. जिस घर में 40 साल की गुरुवारी हांसदा अपने परिवार के साथ रहती थीं, उसी घर के फर्श के नीचे उनका शव दफन मिला. मां के चार दिन से लापता होने पर उनकी शादीशुदा बेटियों को चिंता हुई. वे मायके पहुंचीं तो घर की दीवारों पर खून के धब्बे देखकर उनके मन में अनहोनी की आशंका गहरा गई. उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी. इसके बाद जांच शुरू हुई और घर के भीतर खुदाई के दौरान जो सामने आया, उसने पूरे गांव को सन्न कर दिया.
चार दिन से मां का पता नहीं, बेटियों को सताने लगी चिंता
यह मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के पांड्राशाली थाना क्षेत्र के तुंगी गांव का है. मृतका की पहचान 40 वर्षीय गुरुवारी हांसदा के रूप में हुई है. जानकारी के मुताबिक, गुरुवारी पिछले चार दिनों से लापता थीं. वह कहीं दिखाई नहीं दे रही थीं, जिससे पड़ोसियों को भी शक होने लगा. उन्होंने गुरुवारी की शादीशुदा बेटियों को फोन कर इसकी जानकारी दी.
मां की कोई खबर नहीं मिलने पर बेटियां मायके पहुंचीं. घर के अंदर दीवारों पर खून के धब्बे देखकर उन्हें किसी अनहोनी का डर सताने लगा. उन्होंने देर किए बिना पुलिस को सूचना दी. बेटियों की इस सूचना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.
घर के फर्श के नीचे दफन मिला मां का शव
पुलिस टीम तुंगी गांव पहुंची और घर की तलाशी ली. शुरुआती जांच में घर के अंदर ही शव दफन किए जाने की आशंका सामने आई. इसके बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में घर के फर्श की खुदाई कराई गई. खुदाई के दौरान जमीन के नीचे से गुरुवारी हांसदा का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ.
जिस मां की तलाश में बेटियां मायके पहुंची थीं, उसका शव घर के भीतर ही दफन मिला. इस खुलासे के बाद गांव में सनसनी फैल गई. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए चाईबासा सदर अस्पताल भेज दिया है.
पति हिरासत में, हत्या की वजह तलाश रही पुलिस
मामले में पुलिस ने मृतका के पति राम हांसदा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. शुरुआती तौर पर घरेलू विवाद को घटना की संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन हत्या के पीछे की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है.
पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ के बाद ही मौत की परिस्थितियों का पता चल सकेगा. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि गुरुवारी हांसदा की मौत कैसे हुई और उनके शव को घर के फर्श के नीचे क्यों दफनाया गया.
सत्यजीत कुमार