हिमाचल: BJP के 3 पार्षदों पर लटकी अयोग्यता की तलवार! सरकारी जमीन कब्जाने के आरोप

धर्मशाला नगर निगम के तीन बीजेपी पार्षदों पर सरकारी जमीन कब्जाने के आरोपों के बाद अयोग्यता की सिफारिश हुई. कार्रवाई हुई तो पार्टी बहुमत खो सकती है.

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अगर कार्रवाई होती है, तो बीजेपी पार्षदों की तादाद घटकर 8 ही रह जाएगी. (File Photo: ITG) अगर कार्रवाई होती है, तो बीजेपी पार्षदों की तादाद घटकर 8 ही रह जाएगी. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • धर्मशाला,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:28 PM IST

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला नगर निगम में बीजेपी के तीन नवनिर्वाचित पार्षदों पर सरकारी जमीन पर कब्जा करने के आरोप लगे हैं. इस वजह से उन पर अयोग्य घोषित किए जाने का खतरा मंडरा रहा है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कांगड़ा के डिप्टी कमिश्नर ने एक जांच के आधार पर हिमाचल सरकार से उनके खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है.

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यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि 17 सदस्यों वाले नगर निगम में बीजेपी के पास अभी 11 सीटें हैं. अगर तीनों पार्षद अयोग्य घोषित हो जाते हैं, तो पार्टी की संख्या घटकर आठ रह जाएगी, जिससे वह बहुमत के आंकड़े से नीचे आ जाएगी.

यह सिफारिश डिप्टी कमिश्नर ने हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 8(L) के तहत की है. इस धारा में प्रावधान है कि अगर कोई निर्वाचित प्रतिनिधि या कानूनी उत्तराधिकारी सरकारी जमीन पर कब्जा करते हुए पाया जाता है, तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा.

जांच में क्या सामने आया है?

काउंसिलरों पर सरकारी जमीन पर कब्जा करने और अवैध रूप से कब्जा जमाए रखने की शिकायतों के बाद, जिला प्रशासन ने धर्मशाला के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) मोहित रतन की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई. वार्ड नंबर 2-भागसुनाग के निवासी मीठा भागसुनाग ने काउंसलर शमशेर सिंह नेहरिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी.

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जांच में पाया गया कि होटल मोरेनिक हिल के पास गैर मुमकिन नाला यानी खेती के अयोग्य नाला के तौर पर दर्ज सरकारी वन भूमि पर कंक्रीट का स्लैब बनाकर कथित तौर पर एक पार्किंग एरिया बनाया गया था. जांच के दौरान दर्ज बयानों से पता चलता है कि यह निर्माण कार्य नेहरिया और उनके भाई विशाल सिंह ने किया था.

वार्ड नंबर 15-खनियारा में, वार्ड के ही एक निवासी ने काउंसलर परवीन कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने चुनावी हलफ़नामे में जरूरी जानकारी छिपाई थी.

राजस्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, परवीन कुमार के दादा रोशन लाल ने कथित तौर पर सरकारी जमीन पर घर बनाया था. जांच में पाया गया कि पार्षद प्रासंगिक अयोग्यता प्रावधानों के दायरे में आता है.

यह भी पढ़ें: धौलाधार की वादियों में सजेगा क्रिकेट का महासंग्राम, भारत-अफगानिस्तान वनडे के लिए धर्मशाला तैयार, जानें क्या है खास

वार्ड नंबर 17-सिद्धपुर में एक निवासी ने पार्षद विशाल जामवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और जांच में पता चला कि कथित तौर पर सरकारी जमीन पर बनी एक दुकान का बिजली कनेक्शन 2003 से उनके नाम पर है.

चुनाव अवधि के दौरान, 16 अप्रैल, 2026 को बिजली मीटर कथित तौर पर किसी अन्य शख्स के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया था.

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हालांकि, जांच में पाया गया कि पार्षद संपत्ति का वास्तविक मालिक और लाभार्थी बना रहा. सक्षम न्यायालय के समक्ष धारा 163 के तहत बेदखली की कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है.

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