एक-एक अस्पताल भटका परिवार...24 घंटे तक नहीं मिला वेंटिलेटर, नवजात की मौत

हरियाणा के हिसार में वेंटिलेटर की सुविधा समय पर नहीं मिलने से एक दिन के नवजात की मौत हो गई. पहले नागरिक अस्पताल से रोहतक पीजीआई रेफर किया गया, लेकिन वहां भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं हुआ. परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही और संसाधनों की कमी ने मासूम की जान ले ली.

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24 घंटे तक नहीं मिला वेंटिलेटर, नवजात की मौत (Photo: itg) 24 घंटे तक नहीं मिला वेंटिलेटर, नवजात की मौत (Photo: itg)

aajtak.in

  • हिसार ,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST

 

हरियाणा के हिसार में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है. वेंटिलेटर की सुविधा समय पर नहीं मिलने के कारण महज एक दिन के नवजात की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि पहले हिसार के नागरिक अस्पताल और फिर रोहतक के एक अस्पताल में इलाज के दौरान आवश्यक सुविधा नहीं मिलने से मासूम की जान चली गई. घटना के बाद परिवार ने अस्पताल प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

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जानकारी के अनुसार, हिसार की महावीर कॉलोनी निवासी पूजा को प्रसव के लिए नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बुधवार रात ऑपरेशन के जरिए उन्होंने बेटे को जन्म दिया. जन्म के तुरंत बाद नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने लगी. डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है और बच्चे को बेहतर इलाज के लिए रोहतक के अस्पाताल रेफर कर दिया गया.

परिजनों का कहना है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि रोहतक के अस्पाताल में वेंटिलेटर की व्यवस्था हो जाएगी. लेकिन वहां पहुंचने पर भी नवजात को यह सुविधा नहीं मिल सकी. परिवार के अनुसार, पूरी रात उन्होंने अस्पताल स्टाफ से गुहार लगाई, जिसके बाद उन्हें हाथ से संचालित ऑक्सीजन पंप (एंबू बैग) दिया गया. बच्चे के पिता राकेश ने आरोप लगाया कि वे पूरी रात एंबू बैग के जरिए अपने बेटे को ऑक्सीजन देते रहे, ताकि उसकी सांसें चलती रहें.

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परिवार का आरोप है कि गुरुवार सुबह तक भी वेंटिलेटर की व्यवस्था नहीं हो सकी. इसके बाद उन्हें बच्चे को वापस ले जाने के लिए कहा गया. परिजनों का यह भी कहना है कि उन्हें सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके चलते निजी एंबुलेंस से नवजात को हिसार लाया गया. उनका दावा है कि रास्ते में बच्चे की सांसें चल रही थीं, लेकिन हिसार पहुंचकर जब उसे एक निजी अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

घटना के बाद परिजन नवजात का शव लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचे और विरोध जताया. उनका कहना है कि यदि समय पर वेंटिलेटर और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी. परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और चिकित्सकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.


Input: प्रवीण

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