हरियाणा में हुई फजीहत पर पर्दा डालने में जुटी कांग्रेस, EC के सामने लगाई गुहार

कांग्रेस की शिकायत पर चुनाव आयोग ने हरियाणा के रिटर्निंग ऑफिसर से रिपोर्ट भी मांग ली है, जिसको देखने के बाद चुनाव आयोग इस बारे में अपना फैसला सुनाएगा.

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बीएस हुड्डा, पूर्व सीएम बीएस हुड्डा, पूर्व सीएम

लव रघुवंशी / बालकृष्ण

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2016,
  • अपडेटेड 11:49 PM IST

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में अपने 14 विधायकों के वोट रद्द होने से हुई हार पर फजीहत झेल रही कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वहां के राज्यसभा चुनाव नतीजों को रद्द कर दिया जाए. सोमवार को काग्रेंस पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलकर ये मांग रखी और गडबडी की जांच कराने की मांग की.

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इस प्रतिनिधिमंडल में बी. के. हरिप्रसाद, के अध्यक्ष अशोक तंवर और खुद कांग्रेस-आईएनएलडी समर्थित उम्मीदवार आर. के. आनंद शामिल थे, जो बीजेपी समर्थित सुभाष चंद्रा से चुनाव हार गए. कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव में साजिश के तहत उनके उम्मीदवार को हराया गया और उनके विधायकों को वोट डालने के लिए गलत पेन दे दिया गया जिससे उनके वोट रद्द घोषित हो जाएं.

कांग्रेस की शिकायत पर ने हरियाणा के रिटर्निंग ऑफिसर से रिपोर्ट भी मांग ली है, जिसको देखने के बाद चुनाव आयोग इस बारे में अपना फैसला सुनाएगा.

सुरजेवाला का वोट भी हुआ रद्द
राज्ससभा चुनाव में खरीद फरोख्त, दल बदल और क्रॉस वोटिंग की शिकायतें तो अब आम हो गई हैं. लेकिन देश में यह संभवत: पहला ऐसा मामला है, जहां गलत पेन का इस्तेमाल करने की वजह से एक दो नहीं बल्कि 13 विधायकों के वोट अवैध घोषित हो गए. वहीं एक विधायक रणदीप सुरजेवाला का वोट इसलिए रद्द हो गया क्योंकि उन्होंने अपना वोट कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी को दिखा दिया था. नियमों के मुताबिक वोट गुप्त होता है. बैलेट बॉक्स में डालने से पहले इसे किसी को दिखाने की अनुमति नहीं होती.

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दरअसल वोटों को गुप्त रखने के लिए, राज्यसभा चुनाव में सभी विधायकों को हिदायत होती है कि वो अपना पेन इस्तेमाल नहीं करें और चुनाव अधिकरी द्वारा वोटिंग के लिए रखे गए एक खास पेन से ही मत डालें. हरियाणा में वोटिंग के लिए चुनाव आयोग की तरफ से बैंगनी रंग का एक मार्कर पेन मुहैया कराया गया था, जिसे सबको इस्तेमाल करना था. लेकिन वोटों की गिनती के समय से पता चला कि कांग्रेस के 13 विधायकों ने किसी और पेन से वोट डाल दिया था.

सोनिया को करना पड़ा दखल
सबसे हैरानी की बात ये रही कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर हु़ड्डा ने अपना वोट किसी को दिया ही नहीं और अपना बैलेट पेपर खाली छोड दिया. कांग्रेस के जिन 13 विधायकों के वोट गलत पेन से वोट डालने की वजह से रद्द हुए हैं वो सभी हुड्डा के कैंप के हैं. हुड्डा ने पहले ही कांग्रेस हाईकमान से जाहिर कर दिया था कि वो आर. के. आनंद को समर्थन देने के खिलाफ हैं. लेकिन जब खुद सोनिया गांधी ने इस मामले में सीधे दखल दिया तो माना जा रहा था कि न चाहते हुए भी हुड्डा और उनके करीबी विधायक आर. के. आनंद को समर्थन दे देगें. कांग्रेस हाईकमान ये बिल्कुल नहीं चाहता था कि बीजेपी से करीबी रखने वाले सुभाष चंद्रा चुनाव जीतें. लेकिन हुआ ठीक उल्टा, अपने प्रतिद्वंदी आनंद को मिलने वाले 14 विधायकों से वोट रद्द होने से सुभाष चंद्रा आसानी से जीत गए और सोनिया गांधी की फजीहत हुई वो अलग.

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अब सबसे बडा रहस्य ये बन गया है कि चुनाव आयोग के दिए गए पेन को वोंटिंग वाले जगह से किसने और कब बदला.

कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से जो शिकायत की है उसमें इसका पूरा ब्यौरा दिया गया है. हरियाणा में कुल 90 विधायक हैं और सबने राज्यसभा चुनाव में हिस्सा लिया. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, 73वें नंबर पर बीजेपी के विधायक असीम गोयल ने मतदान किया और उनका वोट सही पाया गया. लेकिन 74 नंबर से लेकर 86 नंबर तक जितने वोट डाले गए सभी गलत पेन से डाले हुए मिले और उन 13 वोटों को अवैध घोषित कर दिया गया.


74वें और 75वें नंबर पर कुलदीप बिश्नोई और उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई ने वोट दिया था, जिन्होनें हाल ही में अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर लिया था. उसके बाद लगातार 11 वोट कांग्रेस के विधायकों ने डाले थे. हैरत की बात है कि 87वें पर जब निर्दलीय विधायक जयप्रकाश ने वोट डाला तो सही पेन मौके पर वापस आ गया और उसके बाद के तीनों वोट भी सही पेन से डाले गए और वैध पाए गए. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी विधायक असीम गोयल और निर्दिलिय विधायक जयप्रकाश ने मिल कर पेन की हेराफेरी की.

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सवाल कांग्रेस पर ही
कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग से यह शिकायत तो कर आई है, लेकिन पार्टी के भीतर ही इस मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आखिर ऐसा कैसे हुआ कि एक नहीं 13 विधायक गलत पेन के धोखे में आ गए? क्या ये महज इत्तफाक है कि जिन विधायकों के वोट अवैध हुए वो सब के सब हुड्डा के समर्थक ही थे? अनुभवी नेता होने के बाद भी रणदीप सुरजेवाला ने किरण चौधरी को अपना बैलेट पेपर दिखाकर अपना वोट खराब क्यों कर लिया? हुड्डा ने पार्टी हाईकमान के कहने के बावजूद अपना वोट खाली छोड़कर बर्बाद क्यों किया? अगर पेन में गड़बड़ी दिख रही थी तो विधायकों ने उसी समय इसकी शिकायत क्यों नहीं की?

क्या होगा हुड्डा का?
कांग्रेस-बीजेपी पर जितने आरोप लगा रही है, उससे ज्यादा उंगलिया भूपिंदर हुड्डा पर उठ रही हैं. कांग्रेस ने नेताओं के बीच अब सुगबुगाहट बस ये है कि हुड्डा के खिलाफ कारवाई करने की हिम्मत हाईकमान जुटा पाता है या नहीं. क्योंकि हु़ड्डा ने बागी तेवर तो दिखाए हैं, लेकिन हरियाणा कांग्रेस पर उनकी मजबूत पकड़ को कांग्रेस में हर कोई जानता है और ऐसे भी इस समय कांग्रेस के दिन खराब चल रहे हैं.

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