सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल से जुड़े गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज कैंपस में रैगिंग से परेशान एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा खुदकुशी किए जाने का मामला सामने आया है. माइक्रोबायोलॉजी विभाग में फर्स्ट ईयर के रेजिडेंट डॉक्टर 28 वर्षीय हर्ष पंड्या ने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी. वह मूल रूप से अरवल्ली जिले के मोडासा के रहने वाले थे. मामले की जांच के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने रैगिंग के आरोप में चार सेकेंड ईयर रेजिडेंट डॉक्टरों को छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है. साथ ही उन्हें हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया है.
पुलिस ने शुरू की जांच
जानकारी के मुताबिक रविवार सुबह हॉस्टल के कमरा नंबर 1004 का दरवाजा अंदर से बंद था. हर्ष पंड्या से संपर्क नहीं हो पाने पर उनके साथी डॉक्टर कमरे के बाहर पहुंचे. काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिलने पर सिक्योरिटी स्टाफ को बुलाया गया. दरवाजा तोड़कर अंदर जाने पर हर्ष पंड्या पंखे से लटके मिले. उन्हें तत्काल सिविल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर मामले की जांच शुरू कर दी है.
घटना के बाद मेडिकल कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी, एंटी रैगिंग स्क्वाड और कॉलेज काउंसिल ने संयुक्त रूप से जांच की. मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक करीब आठ घंटे चली बैठक में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टरों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के बयान लिए गए. जांच में चार सेकेंड ईयर रेजिडेंट डॉक्टरों पर जूनियर डॉक्टरों की रैगिंग और मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप सामने आए.
कमरे में घंटों ली जाती थी जूनियर डॉक्टरों की रैगिंग
न्यू सिविल हॉस्पिटल की सुप्रिटेंडेंट डॉ. पारुल वडगामा के मुताबिक, डॉ. निराली वसावे, डॉ. अनुज महेश्वरी, डॉ. दीक्षिताबेन गेवरिया और डॉ. हीनाबेन भूत पर जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ गाली-गलौज और वर्बल एब्यूज करने के आरोप हैं. आरोप है कि जूनियर डॉक्टरों को दो-दो घंटे एक कमरे में बैठाकर रैगिंग की जाती थी और उन्हें नौकर कहकर अपमानित किया जाता था. इन चारों को छह महीने के लिए सस्पेंड किया गया है.
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एचओडी और तीन फैकल्टी सदस्यों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. प्रशासन के अनुसार कुछ जूनियर डॉक्टरों ने घटना से पहले शिक्षकों से रैगिंग को लेकर शिकायत भी की थी. फिलहाल पुलिस की जांच अलग से जारी है. हर्ष के पिता सुभाष भाई पंड्या ने बताया कि बेटे के दोस्त का फोन आने के बाद उन्हें घटना की जानकारी मिली. उन्होंने कहा कि हर्ष से पढ़ाई या सीनियर्स को लेकर पूछने पर वह कोई बड़ी परेशानी नहीं बताता था. कभी-कभी विभाग में थोड़ी परेशानी होने की बात जरूर कहता था.
संजय सिंह राठौर