गुजरात के सूरत शहर में बिना वैध मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज करने के आरोप में नौ लोगों को पकड़ा गया है. शहर के डिंडोली इलाके में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और जिला स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अलग-अलग क्लीनिकों पर छापेमारी की. पुलिस के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर जरूरी मेडिकल योग्यता के बिना क्लीनिक चला रहे थे. कार्रवाई के दौरान एलोपैथिक दवाइयां, इंजेक्शन, सिरप और मेडिकल उपकरण समेत कुल 95,138 रुपये का सामान जब्त किया गया. पुलिस के अनुसार, सूरत पुलिस कमिश्नर वाबांग जमीर के निर्देश पर बिना वैध मेडिकल योग्यता या कथित फर्जी डिग्री के आधार पर क्लीनिक चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी. पुलिस को आशंका थी कि ऐसे लोगों के गलत इलाज से मरीजों की जान को खतरा हो सकता है. इसी के तहत एसओजी ने अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों की पहचान शुरू की.
एसओजी की टीम को डिंडोली के नवागाम और आसपास के इलाकों में कई क्लीनिक चलाए जाने की सूचना मिली थी. पुलिस ने पहले डमी मरीज भेजकर इनकी जांच कराई. सूचना सही पाए जाने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया गया. मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल बी. पटेल के समन्वय से स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग टीमें बनाई गईं. इसके बाद एसओजी अधिकारियों के साथ मिलकर संबंधित क्लीनिकों पर एक साथ छापेमारी की गई. इस कार्रवाई में एसओजी के पीआई जे.एम. परमार, पीआई के.ए. सावालिया, पीएसआई एम.डी. हड़िया, पीएसआई आर.एस. भाटिया और पीएसआई एम.डी. सरवैया के नेतृत्व में टीमों ने हिस्सा लिया.
कोई 12वीं पास, तो कोई अस्पताल में रह चुका था कंपाउंडर
पुलिस की जानकारी के मुताबिक, पकड़े गए लोगों में कई ऐसे हैं जिन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है और लंबे समय से क्लीनिक चला रहे थे. कुछ लोग पहले अलग-अलग अस्पतालों में कंपाउंडर या नर्स के तौर पर काम कर चुके थे. रोहित उत्तमराव पाटिल: डिंडोली के नवागाम इलाके में माउली क्लीनिक चलाता था. वह 12वीं पास है और करीब तीन साल से क्लीनिक चला रहा था. उसने महाराष्ट्र के संगमनेर स्थित माउली अस्पताल में दो साल कंपाउंडर के तौर पर काम किया था. पुलिस के मुताबिक, उसकी रोजाना की कमाई करीब 1,000 से 1,500 रुपये थी. वर्ष 2024 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में कथित तौर पर नकली प्रेग्नेंसी दवा बेचने के मामले में पकड़े जाने की जानकारी भी सामने आई है.
परमानंद पटेल: नवागाम रोड के आर.डी. नगर इलाके में मनीषा क्लीनिक चलाता था. वह 12वीं पास है और करीब पांच साल से क्लीनिक चला रहा था. उसने उधना तीन रास्ता स्थित श्रद्धा अस्पताल में एक साल कंपाउंडर के रूप में काम किया था. उसकी रोजाना की कमाई करीब 1,000 से 1,500 रुपये बताई गई है. आरतीदेवी मौर्य: नवागाम नगर में आशी क्लीनिक चलाती थी. वह बीए कर चुकी है और करीब डेढ़ साल से क्लीनिक चला रही थी. पुलिस के मुताबिक, उसने सूरत के गोडादरा स्थित अमरदीप अस्पताल में पांच साल नर्स के रूप में काम किया था. उसकी रोजाना की कमाई करीब 2,000 से 2,500 रुपये बताई गई है.
महेशभाई राजपूत: नवागाम नगर के अंबिका इलाके में माया क्लीनिक चलाता था. उसकी उम्र 50 साल बताई गई है. वह 12वीं पास है और करीब आठ साल से क्लीनिक चला रहा था. पुलिस के अनुसार, उसने महाराष्ट्र के धुलिया स्थित श्रद्धा अस्पताल में दो साल कंपाउंडर के तौर पर काम किया था. उसकी रोजाना की कमाई करीब 1,000 से 1,500 रुपये थी. कमलाप्रसाद लोधी गौंड: नवागाम इलाके में कृष्णा क्लीनिक चलाता था. उसकी उम्र 50 साल है और वह 12वीं पास है. पुलिस के मुताबिक, वह करीब दस साल से क्लीनिक चला रहा था. उसकी रोजाना की कमाई 2,500 से 3,500 रुपये बताई गई है. वह उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के एक अस्पताल में कंपाउंडर के रूप में काम कर चुका था.
सोपान पाटिल: नवागाम के स्वप्न सृष्टि रो हाउस इलाके में श्री साईं क्लीनिक चलाता था. उसकी उम्र 53 साल बताई गई है. पुलिस के अनुसार, वह करीब सात साल से क्लीनिक चला रहा था और उसने इलेक्ट्रोपैथी की पढ़ाई की थी. उसकी रोजाना की कमाई करीब 1,000 रुपये बताई गई है. उसके अमृता अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम करने का भी उल्लेख किया गया है. मनोहरलाल कुमावत: डिंडोली में सहजानंद सोसायटी के पास श्री राधेकृष्ण क्लीनिक चलाता था. उसकी उम्र 27 साल है और वह करीब छह महीने से क्लीनिक चला रहा था. पुलिस के मुताबिक, उसने राजस्थान में बीफार्मा की पढ़ाई की है. उसकी रोजाना की कमाई करीब 2,500 से 3,500 रुपये बताई गई है.
दिनेश भारती: नवागाम इलाके में सहगर क्लीनिक चलाता था. उसकी उम्र 46 साल है और वह 12वीं पास है. पुलिस के अनुसार, वह करीब तीन साल से क्लीनिक चला रहा था और उसकी रोजाना की कमाई 2,000 से 2,500 रुपये थी. वह पंजाब के राजपुरा में अपने भाई के क्लीनिक में काम कर चुका था. किशोर विश्वास: नवागाम के उमियानगर इलाके में सदगुरु संत कृपाल क्लीनिक चलाता था. उसकी उम्र 43 साल बताई गई है. वह 12वीं पास है और करीब छह साल से क्लीनिक चला रहा था. पुलिस के मुताबिक, उसने पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित एक अस्पताल में चार साल कंपाउंडर के रूप में काम किया था. उसकी रोजाना की कमाई करीब 1,000 से 2,500 रुपये बताई गई है.
95,138 रुपये का सामान जब्त, क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत भी कार्रवाई
छापेमारी के दौरान अलग-अलग क्लीनिकों से एलोपैथिक दवाइयां, इंजेक्शन, सिरप और मेडिकल उपकरण बरामद किए गए. जब्त सामान की कुल कीमत 95,138 रुपये बताई गई है. पुलिस ने नौ आरोपियों के खिलाफ डिंडोली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है. जिला स्वास्थ्य अधिकारी और जिला पंचायत की टीम की ओर से संबंधित लोगों के खिलाफ क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत अलग से कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है. एसओजी के डीसीपी राजदीप सिंह नकुम के मुताबिक, पकड़े गए लोगों में कुछ 10वीं और 12वीं पास हैं, जबकि कुछ कथित तौर पर फर्जी डिग्री के आधार पर प्रैक्टिस कर रहे थे. पुलिस का कहना है कि बिना जरूरी योग्यता के इलाज करने से मरीजों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है. एसओजी और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद ऐसे क्लीनिकों पर निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है.
संजय सिंह राठौर