एकता दिवस की परेड में आए 87 जवान अस्पताल पहुंचे, 1 की मौत... स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास क्या हुआ?

गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में एकता दिवस की परेड में शामिल होने आए सुरक्षा बलों के 87 जवान पिछले 10 दिनों में गांधीनगर सिविल अस्पताल में भर्ती हुए हैं. बीएसएफ (BSF), सीआरपीएफ (CRPF) और आईटीबीपी (ITBP) के जवानों को डेंगू, बुखार और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. इनमें से 50 जवानों को छुट्टी दे दी गई है.

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अस्पताल में चल रहा जवानों का इलाज. (Photo: ITG) अस्पताल में चल रहा जवानों का इलाज. (Photo: ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • गांधीनगर,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:16 PM IST

गुजरात के केवड़िया में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी है... सरदार वल्लभभाई पटेल की विशाल प्रतिमा... हर साल यहां एकता दिवस के मौके पर परेड होती है. देश के अलग-अलग हिस्सों से सुरक्षा बलों के जवान इसमें हिस्सा लेने पहुंचते हैं. लेकिन इस बार परेड में शामिल होने आए जवानों को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आ गई. पिछले 10 दिनों में बीएसएफ (BSF), सीआरपीएफ (CRPF) और आईटीबीपी (ITBP) के 87 जवानों को गांधीनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

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ये जवान डेंगू और बुखार जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. इनमें से 50 जवानों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है. 37 जवान अब भी अस्पताल में भर्ती हैं. इस बीच इलाज के दौरान एक जवान की मौत हो गई. आखिर जवानों की तबीयत कैसे बिगड़ी? अस्पताल में उनका इलाज किस तरह किया जा रहा है? और जवान की मौत को लेकर क्या जानकारी सामने आई है?

एकता दिवस की परेड में शामिल होने के लिए देश के कई राज्यों से सुरक्षा बलों के जवान गुजरात आए थे. स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया के मुताबिक, ओडिशा, झारखंड, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से आए बीएसएफ, सीआरपीएफ और आईटीबीपी के जवानों को बुखार और दूसरी शारीरिक परेशानियों के बाद गांधीनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया. पिछले 10 दिनों में कुल 87 जवान अस्पताल पहुंचे. इनमें से 50 की हालत में सुधार होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. बाकी 37 जवानों का इलाज जारी है.

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स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, फिलहाल अस्पताल में भर्ती जवानों की हालत स्थिर है और उनकी सेहत में सुधार हो रहा है. किसी भी जवान की स्थिति गंभीर नहीं बताई गई है. हालांकि, शुरुआती जानकारी में जवानों के डेंगू से पीड़ित होने की बात कही गई है, लेकिन सभी 87 जवानों की जांच रिपोर्ट और डेंगू की पुष्टि से जुड़ी जानकारी सामने नहीं आई है.

फिर एक जवान की मौत कैसे हुई?

इस पूरे मामले में दुखद खबर एक जवान की मौत है. अस्पताल में भर्ती एक जवान ने अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत की. डॉक्टरों ने बिना देरी किए ईसीजी समेत जरूरी जांच की. इसके बाद जवान को आईसीयू में शिफ्ट किया गया. डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने जवान की मौत पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि देश की सेवा करने वाले जवान को खोना बेहद दुखद है. राज्य सरकार की ओर से उन्होंने जवान के परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की.

मंत्री ने डॉक्टरों के शुरुआती आकलन के हवाले से बताया कि जवान बुखार और शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद भारी कसरत कर रहा था. आशंका जताई गई कि इससे हार्ट संबंधी परेशानी हुई हो सकती है. जवान को हार्ट अटैक आया था या कार्डियक अरेस्ट हुआ था, इसकी पुष्टि अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी. जवानों की तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया गांधीनगर सिविल अस्पताल पहुंचे. उन्होंने भर्ती जवानों से मुलाकात की और डॉक्टरों से उनके इलाज की जानकारी ली.

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इसके बाद चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मीता पारिख और डॉक्टरों की टीम के साथ बैठक हुई. मंत्री ने निर्देश दिए कि इलाज में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए. जवानों को पर्याप्त पानी पिलाने और डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक पौष्टिक भोजन देने पर खास जोर दिया गया.

नाश्ते में ताजे फल, फलों का रस और सलाद जैसी चीजें उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए. डेंगू के इलाज में कुछ मरीजों को जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स की आवश्यकता हो सकती है. इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में ब्लड और प्लेटलेट्स की भी समीक्षा की गई. जवानों को समय पर उपचार देने के लिए विशेषज्ञ रेजिडेंट डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है. 

स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, जवानों के आवास स्थलों पर मच्छरों का प्रकोप रोकने के लिए दिन में दो बार फॉगिंग के साथ ही तदवा कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही है. यह काम मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के निर्देशों के तहत किया जा रहा है. फिलहाल 50 जवान अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं और 37 का इलाज जारी है. स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, भर्ती जवानों की हालत स्थिर है और उनकी सेहत में सुधार हो रहा है.

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