इथियोपिया में अगवा हुए गुजरात के 3 युवा, 1 करोड़ फिरौती भी मांगी... भारत सरकार की सूझबूझ से हुई वतन वापसी

गुजरात के तीन युवा इथियोपिया में अगवा हो गए थे. अपहरणकर्ताओं ने उनके परिवारों से रिहाई के बदले 1 करोड़ रुपये की फिरौती भी मांगी थी. लेकिन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और स्थानीय पुलिस की सूझबूझ से बिना कोई फिरौती दिए तीनों को सुरक्षित मुक्त कराया गया. तीनों अब अपने गांवों में लौट आए हैं, जहां उनके परिवार और गांव वालों ने उनकाम गर्मजोशी से स्वागत किया.

Advertisement
तीनों युवाओं का गांव में जोरदार स्वागत हुआ. (Photo- ITGD) तीनों युवाओं का गांव में जोरदार स्वागत हुआ. (Photo- ITGD)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:59 PM IST

गुजरात के तीन युवा गैर-कानूनी तरीके से अमेरिका पहुंचने के लालच में ट्रैवल एजेंटों के जाल में फंस गए थे. उन तीनों को इथियोपिया में बंधक बना लिया गया था. अब आखिरकार ये तीन युवा अपने घर लौट आए हैं.

अपहरणकर्ताओं ने इन तीनों की रिहाई के बदले परिवारों से 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती की मांग की थी. हालांकि, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और स्थानीय पुलिस की सूझबूझ के चलते अपहरणकर्ताओं को बिना एक भी रुपया दिए इन तीनों को सुरक्षित मुक्त करा लिया गया.

Advertisement

आज दोपहर जब ये युवक-युवतियां मेहसाणा और गांधीनगर स्थित अपने गांवों में पहुंचे, तो परिजनों की आंखें खुशी से छलक उठीं और पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया.

परिवारों में छाई खुशी, मंदिर जाकर टेका माथा

इथियोपिया में बंधक बनाए गए मेहसाणा और गांधीनगर के इन तीनों युवाओं की पहचान ऋत्विज, ममता और मयूरी के रूप में हुई है. उनके सुरक्षित वतन लौटने की खबर मिलते ही परिजनों की जान में जान आई. परिवार के लोग मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से गाड़ी के जरिए तीनों को सुरक्षित उनके पैतृक गांव वडस्मा ले आए.

घर पहुंचते ही सबसे पहले इन युवाओं ने घर पर माताजी के दर्शन किए और उसके बाद गांव के प्रसिद्ध सधी माता मंदिर जाकर मत्था टेका. जैसे ही तीनों के अपने गांव लौटने की खबर फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पर जमा हो गए. सभी ने पीड़ित परिवार के साथ मिलकर अपनी खुशी जताई.

जानकारी के मुताबिक, मेहसाणा के वडस्मा गांव के रहने वाले ऋत्विक जनसारी, गोजारिया की युवती ममता चावड़ा और गांधीनगर की रहने वाली मयूरी आपस में रिश्तेदार हैं. ये तीनों कडी के डांगरवा गांव के एक स्थानीय एजेंट अल्पेश के संपर्क में आकर अमेरिका जाने के लिए निकले थे. वो 20 सितंबर को अमेरिका के लिए रवाना हुए थे. 

Advertisement

शुरुआत में 22 सितंबर को बेटी ने अपने पिता को फोन कर कनाडा पहुंच जाने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद उनका परिवार से सारा संपर्क टूट गया.

राब्ता न होने पर परिवार ने दर्ज कराई शिकायत

जब काफी दिनों तक कोई राब्ता नहीं हुआ, तो पिछले सप्ताह परिजनों ने घबराकर स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. जांच में सामने आया कि स्थानीय एजेंट ने मुख्य एजेंट के भरोसे इन तीनों को पहले जयपुर से एतिहाद एयरवेज की फ्लाइट से अबू धाबी भेजा था. वहां से वो इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा पहुंचे, जहां स्वाजीलैंड स्ट्रीट स्थित GSF कैंप में रुके थे.

इन लोगों ने 19 सितंबर से 19 अक्टूबर तक का ई-वीजा लिया था, लेकिन वहां पहुंचते ही वो अपराधियों के चंगुल में फंस गए और परिवारों से 1 करोड़ की फिरौती मांगने का सिलसिला शुरू हो गया.

मेहसाणा पुलिस ने इस मामले को लेकर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया. मंत्रालय और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल से दस्तावेज तुरंत उच्च स्तर पर भेजे गए. अपहरणकर्ताओं के फोन आने पर परिजनों को साथ रखकर सीधी बातचीत की गई.

बिना फिरौती दिए मिली रिहाई

भारतीय प्रशासनिक तंत्र के उच्च अधिकारियों ने अपहरणकर्ताओं को कानून की सख्त भाषा समझाई और परिवार की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए भारी राजनयिक दबाव बनाया. इसकी वजह से अपहरणकर्ता बिना एक भी रुपया फिरौती लिए ही इन तीनों युवकों को छोड़ने के लिए पूरी तरह मजबूर हो गए. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »