15 हजार टैबलेट, 1200 स्ट्रिप... लखनऊ से गुजरात पहुंची खेप, ब्लड प्रेशर की नकली दवाओं का मास्टरमाइंड कौन?

अहमदाबाद में नकली ब्लड प्रेशर की दवा का बड़ा मामला सामने आया है. क्राइम ब्रांच और फूड एंड ड्रग्स विभाग की कार्रवाई में करीब 1200 स्ट्रिप नकली दवा जब्त की गई हैं. जांच के मुताबिक, पिछले चार महीनों में 1500 स्ट्रिप यानी करीब 15 हजार नकली गोलियां बेची जा चुकी हैं. इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, नकली दवा का नेटवर्क गुजरात से लेकर उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक फैला हुआ है.

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गुजरात के कई शहरों तक फैला नकली BP की दवाओं का नेटवर्क. (Photo: Screengrab) गुजरात के कई शहरों तक फैला नकली BP की दवाओं का नेटवर्क. (Photo: Screengrab)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 28 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:50 AM IST

सोचिए, कोई व्यक्ति ब्लड प्रेशर की दवा लेने मेडिकल स्टोर पहुंचे. डॉक्टर की लिखी दवा खरीदे और भरोसे के साथ लौटे. लेकिन अगर वही दवा नकली निकले तो? अहमदाबाद में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है. क्राइम ब्रांच और फूड एंड ड्रग्स विभाग ने नकली ब्लड प्रेशर की दवा की करीब 1200 स्ट्रिप बरामद की हैं.

जांच में पता चला कि पिछले चार महीनों में 1500 स्ट्रिप मरीजों को बेची जा चुकी थीं. एक स्ट्रिप में 10 गोलियां थीं, यानी करीब 15 हजार नकली गोलियां मरीजों तक पहुंचीं. इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कोर्ट ने उन्हें 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है.

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कहानी अहमदाबाद के सैटेलाइट इलाके की है. यहां लीलावती फार्मेसी एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड में एक ऐसी दवा मिलने की शिकायत हुई, जिस पर नाम तो असली कंपनी का था, लेकिन दवा के नकली होने का शक था. यह दवा ब्लड प्रेशर के मरीजों को दी जाने वाली दवा है. शिकायत फूड एंड ड्रग्स विभाग तक पहुंची. जांच शुरू हुई तो मामला एक मेडिकल स्टोर से निकलकर पूरे नेटवर्क तक पहुंचता चला गया.

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जांच में सामने आया कि दवा के पैकेट पर भरूच की कंपनी का नाम और बैच नंबर दर्ज था. लेकिन जांच एजेंसियों को पता चला कि बाजार में इसी नाम और बैच की नकली दवा खपाई जा रही थी. इसके बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और फूड एंड ड्रग्स विभाग ने कार्रवाई की. पुलिस ने अहमदाबाद में अलग-अलग जगहों से नकली दवा की करीब 1200 स्ट्रिप जब्त की गईं.

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इसके आगे की जांच हुई तो पता चला कि पिछले करीब चार महीनों में 1500 स्ट्रिप पहले ही मरीजों को बेची जा चुकी थीं. एक स्ट्रिप में 10 टैबलेट होती हैं. यानी हिसाब लगाइए- करीब 15 हजार नकली ब्लड प्रेशर की गोलियां मरीजों तक पहुंच चुकी थीं. इनमें से हर स्ट्रिप को 112.90 रुपये में बेचा जाता था. अब सवाल था कि आखिर इतनी बड़ी खेप अहमदाबाद पहुंची कैसे?

लखनऊ से चला नेटवर्क, गुजरात तक पहुंची नकली दवा

जांच आगे बढ़ी तो कनेक्शन उत्तर प्रदेश के लखनऊ से जुड़ गया. पुलिस के मुताबिक, देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी नाम के व्यक्ति गुजरात में इस नकली दवा का स्टॉक सप्लाई कर रहे थे. पुलिस को यह भी पता चला कि नकली दवा का स्टॉक पहले उत्तराखंड से लखनऊ पहुंचा था. इसके बाद वहां से इसे अलग-अलग जगहों पर भेजा गया. 

कुल 3600 स्ट्रिप की खेप तैयार हुई थी. इसमें से 2700 स्ट्रिप अहमदाबाद भेजी गईं और 900 स्ट्रिप मैसूर भेजी गईं. अहमदाबाद पहुंची 2700 स्ट्रिप में से 1200 स्ट्रिप पुलिस के हाथ लग गईं. लेकिन बाकी 1500 स्ट्रिप बाजार में बिक चुकी थीं. यानी पुलिस के पहुंचने से पहले ही नकली दवा का एक बड़ा हिस्सा मरीजों तक पहुंच चुका था.

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जांच में अहमदाबाद के मेडिकल स्टोर का नाम सामने आया. आरोप है कि इस मेडिकल के दर्शिल संघवी को इस दवा के नकली होने की जानकारी थी. इसके बावजूद उसने कथित तौर पर 18 फीसदी कमीशन के लालच में स्टॉक खरीदा. इसके बाद यही स्टॉक अहमदाबाद के करीब 11 मेडिकल स्टोर तक पहुंचाया गया. यानी पूरा सप्लाई नेटवर्क काम कर रहा था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.

सिर्फ अहमदाबाद नहीं, दूसरे शहर भी निशाने पर

जांच में यह भी सामने आया है कि नकली दवा का स्टॉक सिर्फ अहमदाबाद में नहीं खपाया गया. इसकी सप्लाई सूरत, भावनगर, नडियाद और भुज तक होने की बात सामने आई है. अब जांच का दायरा अब अहमदाबाद से निकलकर गुजरात के दूसरे शहरों तक पहुंच चुका है. क्राइम ब्रांच की चार टीमें अलग-अलग राज्यों में जांच कर रही हैं. सवाल है कि नकली दवा बनी कहां और इसके पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है.

जांच में कई सवाल सबसे अहम हो गए हैं. दवा कहां तैयार हुई? उसकी पैकेजिंग कहां की गई?असली कंपनी के नाम वाले पैकेट और सील कैसे तैयार हुए? लेबल और पैकिंग का सामान कहां से आया? दवा की सीलिंग के लिए किस तरह की मशीनरी इस्तेमाल हुई? और इस पूरे नेटवर्क को चलाने वाला मास्टरमाइंड कौन है? पुलिस इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है. इस मामले में क्राइम ब्रांच ने दर्शिल संघवी, देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी को गिरफ्तार किया है. तीनों को अहमदाबाद मेट्रो कोर्ट में पेश किया गया. क्राइम ब्रांच ने पूछताछ के लिए 10 दिन की रिमांड मांगी थी. हालांकि कोर्ट ने 7 दिन की रिमांड मंजूर की.

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पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली दवा का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक जुड़े हैं. वहीं महाराष्ट्र में भी दो आरोपियों के खिलाफ इसी तरह की शिकायत दर्ज होने की जानकारी सामने आई है.

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