अहमदाबाद साइबर क्राइम ने 'बॉस स्कैम' के जरिए 1.50 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के दो सदस्यों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है. आरोपी इमरान अली और इंजमुल मोल्ला डमी सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे. इस कार्रवाई के साथ चीन, पाकिस्तान, भारत और हांगकांग तक फैले अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस ने 1.13 करोड़ रुपये बरामद किए हैं और करीब 4,500 सिम कार्ड की जांच की जा रही है.
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के साइबर सेल को यह सफलता अहमदाबाद के एक व्यापारी के साथ हुए 'बॉस स्कैम' की जांच के दौरान मिली. अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर अनुपमसिंह गहलोत ने बताया कि 23 जून को आरोपियों ने RBI अधिकारी होने का दावा करते हुए व्यापारी के मोबाइल पर व्हाट्सएप के जरिए एक ZIP फाइल भेजी. बैंक खाता फ्रीज होने का डर दिखाया गया.
इसके बाद कंपनी के फाइनेंस डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी के नाम से व्हाट्सएप मैसेज भेजकर अकाउंटेंट से RTGS के जरिए 1.50 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए. व्यापारी के 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करने के बाद पुलिस ने 1.13 करोड़ रुपये बरामद कर लिए.
ठगी से पहले मैलवेयर वाली ZIP फाइल भेजते थे
जांच में सामने आया कि साइबर ठग पहले बैंकिंग या रेगुलेटरी मुद्दों के नाम पर मैलवेयर वाली ZIP फाइल भेजते थे. कंप्यूटर में इस फाइल के खुलते ही ठगों को WhatsApp Web का एक्सेस मिल जाता था. इसके बाद आरोपी कंपनी के CEO या डायरेक्टर की फोटो और प्रोफाइल का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के झूठे मैसेज भेजते और धोखाधड़ी करते थे.
फिंगरप्रिंट का गलत इस्तेमाल से एक्टिव होता था सिम
PoS ऑपरेटर के तौर पर काम करने वाला आरोपी इमरान ग्राहकों के बायोमेट्रिक्स यानी फिंगरप्रिंट का गलत इस्तेमाल कर उनके नाम पर फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट करता था. वह व्हाट्सएप, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के लिए OTP बेचता था. पिछले 5 सालों में उसने 21,000 से ज्यादा OTP बेचकर 21 लाख रुपये और व्हाट्सएप एक्टिवेशन के लिए 900 OTP बेचकर 2.25 लाख रुपये से ज्यादा कमाए थे.
मैलवेयर चीन के साइबर गिरोह से जुड़ा
पुलिस जांच में इस नेटवर्क से जुड़े करीब 4,500 सिम कार्ड और 26 राज्यों से साइबर धोखाधड़ी की 251 शिकायतें सामने आई हैं. शुरुआती जानकारी के अनुसार, घोटाले में इस्तेमाल किया गया मैलवेयर चीन के साइबर गिरोह से जुड़ा है, जबकि पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित कॉल सेंटर से भारतीय नागरिकों को निशाना बनाया जाता था. चीन आधारित VPN के जरिए बैंक अकाउंट ऑपरेट किए जाते थे. साइबर क्राइम ब्रांच ने 10,000 से ज्यादा डिवाइस की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है.
ब्रिजेश दोशी