150 लड़कियां करती थीं कॉल, 20 लड़के बनते थे डॉक्टर... वजन कम करने में फंस जाती थीं महिलाएं

फेसबुक पर Weight Loss का विज्ञापन दिखा, नंबर डाला और फिर शुरू हो गया करोड़ों की ठगी का खेल. गुरुग्राम में 170 से ज्यादा लोगों का कॉल सेंटर चल रहा था. 150 लड़कियां 'हेल्थ एक्सपर्ट' बनकर बात करती थीं, 20 लड़के डॉक्टर बन जाते थे. पुलिस का दावा है कि इसी स्क्रिप्ट पर चलकर देशभर की महिलाओं से करीब 80 करोड़ रुपये ठग लिए गए.

Advertisement
गुरुग्राम में खोल रखा था ऑफिस. (Photo: ITG) गुरुग्राम में खोल रखा था ऑफिस. (Photo: ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

जरा सोचिए... आप फेसबुक स्क्रॉल कर रहे हैं. अचानक एक विज्ञापन दिखता है- '30 दिन में वजन कम करें, बिना एक्सरसाइज और बिना डाइटिंग.' आप क्लिक करते हैं, अपना मोबाइल नंबर डालते हैं और बस... यहीं से शुरू हो जाता है करोड़ों की ठगी का खेल... सूरत पुलिस ने ऐसे ही एक हाईटेक साइबर रैकेट का खुलासा किया है.

पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क का कंट्रोल गुरुग्राम से हो रहा था और इसका सेटअप किसी मल्टीनेशनल कंपनी से कम नहीं था... कंपनी का नाम था 'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड'... बाहर से यह एक हेल्थ एंड वेलनेस कंपनी दिखती थी. लेकिन पुलिस के मुताबिक, अंदर करीब 170 लोगों की टीम बैठी थी. इनमें 150 लड़कियां थीं, जिनका काम था फेसबुक पर देखकर फंसने वाले लोगों से बात करना. और 20 लड़के थे, जो फोन पर डॉक्टर बन जाते थे.

Advertisement

यहीं से शुरू होती थी पूरी कहानी. महिला ने जैसे ही विज्ञापन पर क्लिक किया, कुछ ही मिनटों में वॉट्सऐप पर मैसेज और कॉल आने शुरू हो जाते. दूसरी तरफ बैठी टेलीकॉलर खुद को हेल्थ एडवाइजर या डॉक्टर की असिस्टेंट बताती. बातों-बातों में भरोसा जीत लिया जाता. फिर फोन किसी 'डॉक्टर' को ट्रांसफर कर दिया जाता.

पुलिस के मुताबिक, यही 'डॉक्टर' असल में कॉल सेंटर में बैठा कोई दूसरा कर्मचारी होता था. कभी वह 'डॉ. एम.के. खन्ना' बन जाता, कभी 'डॉ. आकाश मल्होत्रा'... आवाज बदलना, मेडिकल भाषा बोलना और कॉन्फिडेंस के साथ सलाह देना... यही उसकी सबसे बड़ी चालाकी थी.

यह भी पढ़ें: वेब सीरीज से सीखा ठगी का खेल, वडोदरा में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर चलाकर अमेरिकी नागरिकों से लाखों की ठगी

लेकिन सिर्फ बातों से काम नहीं चलता था. पीड़ित के लिए फर्जी मेडिकल फाइल बनाई जाती. बॉडी प्रोफाइल तैयार होती. वजन, BMI, मेटाबॉलिज्म और न जाने कितने मेडिकल शब्दों से भरी रिपोर्ट भेजी जाती. सब कुछ इतना प्रोफेशनल लगता कि सामने वाले को शक ही नहीं होता.

Advertisement

फिर शुरू होती थी दवाओं की बिक्री. एक किट खत्म हुई नहीं कि दूसरी की सलाह. फिर तीसरी. हर बार कहा जाता- बस यह आखिरी स्टेप है, इसके बाद रिजल्ट दिखने लगेगा. और इसी तरह लाखों रुपये निकलते चले जाते. लेकिन इस गैंग का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक कुछ और था.

साइबर ठगी करने के बावजूद यह लोग ऑनलाइन पैसे लेने से बचते थे. पुलिस के मुताबिक, बैंक खाते में सिर्फ नाम भर का पैसा आता था. बाकी करोड़ों रुपये कैश में लिए जाते थे. इसके लिए गैंग के सदस्य फ्लाइट पकड़कर दिल्ली से दूसरे शहर पहुंचते, कथित दवा का पैकेट देते और बदले में नोटों से भरा बैग लेकर वापस लौट जाते.

सूरत की एक महिला इसी जाल में फंस गई. पुलिस का दावा है कि पांच महीने में उससे 1.77 करोड़ रुपये वसूले गए. जब उससे 81.50 लाख रुपये और मांगे गए और कथित तौर पर कहा गया कि पैसे नहीं दिए तो दवा का साइड इफेक्ट होगा, तब उसे शक हुआ. महिला ने सूरत साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया. इसके बाद पुलिस ने भी जाल बिछाना शुरू कर दिया.

महिला से कहलवाया गया कि पैसे तैयार हैं. जैसे ही गिरोह का एक सदस्य कैश लेने पहुंचा, पुलिस ने उसे दबोच लिया. उसकी निशानदेही पर गुरुग्राम के कॉल सेंटर में छापा पड़ा और पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं.

Advertisement

जांच में पता चला कि कंपनी 2021 में रजिस्टर्ड हुई थी और 2022 से कथित तौर पर इसी मॉडल पर काम कर रही थी. पुलिस का दावा है कि सिर्फ बैंक खातों में करोड़ों रुपये का लेनदेन मिला है, जबकि असली खेल कैश वसूली का था. यानी, यह कोई कॉल सेंटर नहीं था. पुलिस का कहना है कि यह एक 'स्क्रिप्टेड फ्रॉड फैक्ट्री' थी, जहां डॉक्टर से लेकर हेल्थ एक्सपर्ट तक... सबकी भूमिका तय थी.

पूरे मामले को लेकर एडीशनल कमिश्नर ने क्या कहा?

एडीशनल कमिश्नर डॉ. करणराजसिंह वाघेला ने बताया कि सूरत पुलिस ने गुरुग्राम के 4 लोगों को पकड़ा है. आरोप है कि कंपनी ने फेसबुक पर विज्ञापन देकर देशभर में 80 करोड़ का घोटाला किया है. अर्सलान नाम का आरोपी आवाज बदलने में माहिर था. उसने महिला से कभी देश के जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. खन्ना तो कभी डॉ. मल्होत्रा बनकर अलग-अलग आवाजों में बात की. कॉल सेंटर की टेलीकॉलर हेना तन्वी शर्मा बनकर बात करती थी.

वहीं निशा कुमारी प्रिया गुप्ता बनकर बात करती थी. इन दोनों ने महिला को यकीन दिला दिया था कि डॉक्टर उन्हें सही सलाह दे रहे हैं. गैंग का खास सदस्य मोहम्मद हुसैन उर्फ राहुल राज और ओमप्रकाश रजाक दिल्ली से फ्लाइट के जरिए पार्सल लेकर सूरत आते थे.

Advertisement

ये आरोपी महिला के घर जाकर दवा देते थे और बैग भरकर करोड़ों की नकदी फ्लाइट से दिल्ली ले जाते थे. टीम ने पुलिस ने इस गैंग के पास से लैपटॉप, मोबाइल और नकली दवाओं का जखीरा बरामद किया है. इस पूरे नेटवर्क को खड़ा करने वाली कंपनी के मुख्य डायरेक्टर अमित गौरव और चीफ एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिसर पंकज शर्मा और मैनेजर दीपक अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »