शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों समेत देश भर में प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच खुशी का माहौल है. CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने विरोध प्रदर्शन के मंच से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर खुशी जताई. लेकिन इस पूरे जश्न और जीत की स्पीच के दौरान एक बात ने सबको हैरान कर दिया. दरअसल, अभिजीत दिपके ने अपने पूरे भाषण में लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का नाम तक नहीं लिया, जिसने अपनी जान दांव पर लगाकर इस आंदोलन को एक देशव्यापी आंदोलन बनाया था
शनिवार को जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आई, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुट गई. मंच से प्रोटेस्टर्स को संबोधित करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की वजह से मुझे हीरो बनाने की गलती मत करना. यह देश इसीलिए बर्बाद हुआ है क्योंकि हम किसी एक इंसान को हीरो बना देते हैं.'
दिपके ने आगे कहा कि यह इस्तीफा इस बात का सबूत है कि अगर आम जनता सरकार से डरेगी नहीं, तो लोकतंत्र में किसी को भी झुकाया जा सकता है. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि जहां दिपके खुद को हीरो न बनाने की वकालत कर रहे थे, वहीं उन्होंने सोनम वांगचुक के 26 दिनों के कड़े संघर्ष का एक बार भी कोई जिक्र नहीं किया.
26 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे थे सोनम वांगचुक
6 जून को जब अभिजीत दिपके अमेरिका से भारत आए और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया, तब शुरुआत में भीड़ बहुत कम थी. आंदोलन कमजोर पड़ता देख, 28 जून को सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए.
जैसे-जैसे उनकी भूख हड़ताल के दिन बढ़ते गए और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. उनकी हंगर स्ट्राइक ने पूरे देश का ध्यान इस आंदोलन की तरफ खींचा. सोशल मीडिया पर लाखों लोगों ने अपनी व्हाट्सएप डीपी (DP) बदलकर "आई सपोर्ट सोनम" लगा ली थी. हालत इतनी खराब हो गई कि प्रशासन को वांगचुक को जबरन अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. फिलहाल वह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं.
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जब पुलिस ने बल प्रयोग किया, तो जनता का गुस्सा फूट पड़ा. हजारों की संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंच गए. इसके बाद आंदोलन का पूरा रुख ही बदल गया.
22 जुलाई (बुधवार) को केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल जाकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की. मंत्रियों के भरोसे के बाद वांगचुक ने अपना 26 दिनों का उपवास तोड़ दिया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जिद को थोड़ा कम कर दिया.
बस यहीं से आंदोलनकारी छात्रों और वांगचुक के बीच सोच का फासला बढ़ गया. सीजेपी के छात्र नेताओं का मानना था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही उनकी आखिरी मंजिल है, जिससे कोई समझौता नहीं हो सकता. सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि यह आंदोलन अब किसी एक संगठन या व्यक्ति से बहुत बड़ा हो चुका है और पूरा देश प्रधान का इस्तीफा चाहता है.
शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो आ गया और छात्रों की मांग पूरी हो गई, लेकिन जीत की इस घड़ी में सोनम वांगचुक को पूरी तरह भुला दिया जाना कई लोगों को खटक रहा है. वहीं दूसरी ओर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनम वांगचुक ने भी अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहीं भी कॉकरोच जनता पार्टी और अभिजीत दिपके को मेंशन नहीं किया.
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