दिल्ली में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने रखा है. जिन इलाकों में 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान सबसे कम वोटिंग हुई थी, उन्हीं इलाकों से सबसे ज्यादा वोटरों के नाम काटे गए हैं. दिल्ली के कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से करीब 47.58 लाख मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गया है. यानी हर तीसरे वोटर का नाम गायब है, जो कुल संख्या का करीब 33 फीसदी बैठता है.
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ी वजह अवैध निर्माण को गिराया जाना और झुग्गी बस्तियों का दूसरी जगह शिफ्ट होना है. जब आंकड़ों की गहराई से जांच की गई तो पता चला कि 2025 में सबसे कम वोटिंग वाली 18 विधानसभा सीटों में से 17 सीटों पर डिजिटल वेरिफिकेशन की दर दिल्ली के औसत 67 फीसदी से काफी कम रही.
घर घर जाकर किए गए वेरिफिकेशन अभियान में भी इन्हीं इलाकों में सबसे ज्यादा लोग या तो अनुपस्थित मिले, या वे कहीं और शिफ्ट हो चुके थे, या उनकी मौत हो चुकी थी, या फिर उनका नाम एक से ज्यादा जगह की सूची में दर्ज पाया गया. आयोग ने ऐसे सभी मामलों को गैर संग्रहणीय श्रेणी में डाल दिया है. इन सभी वोटरों को अब आयोग की तरफ से नोटिस भेजा जाएगा, और वे 30 सितंबर तक फॉर्म 6 भरकर जरूरी दस्तावेजों के साथ अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं.
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जिलावार आंकड़ों की बात करें तो वोटर संख्या के हिसाब से मटियाला सबसे बड़ी विधानसभा सीट है, जहां अब भी सबसे ज्यादा वोटर बचे हैं. वहीं दिल्ली कैंट सबसे छोटी सीट है, जहां सबसे कम वोटर बचे हैं. वोट कटौती से सबसे ज्यादा असर ओखला इलाके पर पड़ा है, जहां करीब 1.82 लाख वोटरों के नाम कटे. दक्षिण पूर्व जिले में सबसे ज्यादा 43.62 फीसदी फॉर्म अनकलेक्टेड श्रेणी में पाए गए. नई दिल्ली इलाके में भी 39.22 फीसदी वोट कटे, जबकि बाहरी दिल्ली में सबसे कम, यानी 24.32 फीसदी वोट कटे.
इस पूरे मामले पर सियासत भी गरमा गई है. आम आदमी पार्टी का आरोप है कि जानबूझकर उन्हीं इलाकों को निशाना बनाया गया है जहां गरीब, मजदूर और प्रवासी मतदाता रहते हैं. पार्टी का दावा है कि झुग्गी बस्तियों और अनधिकृत कॉलोनियों में करीब 50 फीसदी घरों तक फॉर्म पहुंचा ही नहीं. वहीं बीजेपी ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी है और इसका मकसद फर्जी और अवैध प्रवासियों के नाम हटाना है, ताकि वोटर लिस्ट साफ सुथरी बन सके.
फिलहाल यह सिर्फ ड्राफ्ट लिस्ट है, फाइनल नहीं. जिन योग्य मतदाताओं के नाम गलती से कट गए हैं, वे दस्तावेजों के साथ फॉर्म 6 भरकर दावे और आपत्तियां 30 सितंबर 2026 तक दर्ज करा सकते हैं. सभी सुधारों के बाद दिल्ली की अंतिम वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जाएगी.
संजय शर्मा